कोलकाता, 06 अक्टूबर। प्रसिद्ध और वयोवृद्ध रवींद्र संगीत गायिका विभा सेनगुप्ता का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वह पिछले कुछ समय से कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बढ़ती उम्र संबंधी स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण उनका निधन हुआ है।
प्रख्यात रवींद्र संगीत गायिका श्रावणी सेन ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि सोमवार यानी छह अक्टूबर दोपहर करीब 12 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
बताया जा रहा है कि उनके शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी थी, जिसके कारण उन्हें बीच-बीच में रक्त चढ़ाना पड़ता था। इसके अलावा उन्हें कोई गंभीर या जटिल बीमारी नहीं थी और वह आम तौर पर स्वस्थ थीं। अस्पताल से उनके पार्थिव शरीर को मंडेविला गार्डन्स स्थित उनके आवास पर ले जाया गया है।
विभा सेनगुप्ता के निधन से बंगाल के संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। कई हस्तियों ने इस वयोवृद्ध गायिका के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। मूल रूप से त्रिपुरा की निवासी विभा सेनगुप्ता वर्ष 1959 में कोलकाता आई थीं। उन्होंने लंबे समय तक माया सेन से संगीत की बारीकियां सीखीं और इसके बाद उन्हें दिग्गज संगीतकार देवव्रत विश्वास से भी गायन सीखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
विभा सेनगुप्ता के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए जाने-माने संगीतकार आलोक रायचौधुरी ने कहा कि बीते 29 सितंबर को ही ‘लोकभारती’ संस्था की ओर से विभा देवी के आवास पर जाकर उन्हें सम्मानित किया गया था। उस समय वह बेहद ऊर्जावान थीं, सभी के साथ हंसकर बातें कर रही थीं और उन्होंने कई किस्से भी साझा किए थे। चंद दिनों के भीतर ही यह क्या से क्या हो गया! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
आलोक रायचौधुरी ने उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संगीत के साथ जीवन भर गहराई से जुड़े रहने के बावजूद, विभा सेनगुप्ता को अपने जीवन के अंतिम पड़ाव (पिछले 10-12 वर्षों) में ही व्यापक पहचान और लोकप्रियता मिली। हालांकि, उन्हें कभी भी नाम, यश या मीडिया के प्रचार-प्रसार की कोई चाह नहीं रही। वह पूरी लगन और समर्पण के साथ अपने विद्यार्थियों को तैयार करती थीं और अपने गुरु देवव्रत विश्वास की जयंती भी अत्यंत निष्ठा के साथ मनाती थीं। वह सुचित्रा मित्रा, कणिका बनर्जी और नीलिमा सेन जैसी महान गायिकाओं के दौर की कलाकार थीं, लेकिन जीवन भर किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा और चकाचौंध से खुद को दूर रखा।
