प्रह्लाद जोशी

बेंगलुरु, 01 नवंबर । केंद्रीय शिक्षा, उपभोक्ता मामले मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि देश में रेलवे क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हो रहे हैं। केंद्र सरकार ने आतंकवादियों के बम और गोलियों की आवाज को दबाकर बुलेट ट्रेनों के युग की शुरुआत की है।

वे रविवार को बेंगलुरु के सर एम. विश्वेश्वरैया रेलवे टर्मिनल पर बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रेल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ‘कवच’ स्वचालित ट्रेन सुरक्षा तकनीक लागू की जा रही है। रेल दुर्घटनाओं को रोकने में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

केंद्रीय मंत्री जोशी ने कहा कि देशभर में वंदे भारत ट्रेनों की सेवाओं का विस्तार हुआ है और वर्तमान में 150 से अधिक ट्रेनें संचालित हो रही हैं। रेलवे परिवहन में गति, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं पर केंद्र सरकार विशेष ध्यान दे रही है।

उन्होंने कहा कि बेंगलुरु और मुंबई देश के दो प्रमुख आर्थिक केंद्र हैं। इन दोनों शहरों के बीच संपर्क को मजबूत बनाने में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन महत्वपूर्ण साबित होगी। दक्षिण भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लगभग 1,118 किलोमीटर की दूरी केवल 16 घंटे में तय करेगी। इससे यात्रा के समय में लगभग आधी बचत होगी।

उन्होंने बताया कि कर्नाटक में भी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की योजना केंद्र सरकार ने बनाई है। तुमकुरु, हावेरी, राणेबेन्नूर और बेलगावी सहित राज्य के कई क्षेत्रों को जोड़ने के प्रस्ताव हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार कर्नाटक में रेलवे विकास को विशेष प्राथमिकता दे रही है। वर्ष 2008 में राज्य को रेलवे के लिए लगभग 700 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता था, जबकि अब प्रतिवर्ष 7,000 से 8,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में कर्नाटक के लिए 7,748 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। राज्य में रेलवे संपर्क के विकास के लिए लगातार सहयोग देने पर उन्होंने प्रधानमंत्री, रेल मंत्री और केंद्रीय राज्य मंत्री सोमन्ना के प्रति कन्नड़ जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।

उन्होंने रेल मंत्री वैष्णव की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि तकनीकी पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले रेल मंत्री रेलवे क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार लागू कर रहे हैं। उन्होंने देश में सौर ऊर्जा उत्पादन की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले भारत की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता केवल 2.6 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 170 गीगावाट से अधिक हो गई है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी, वी. सोमन्ना, शोभा करंदलाजे, सांसद पी.सी. मोहन, डॉ. सी.एन. मंजूनाथ, तेजस्वी सूर्या, लहर सिंह सिरोया, जग्गेश, पूर्व सांसद उमेश जाधव सहित कई गणमान्य व्यक्ति और रेलवे अधिकारी उपस्थित थे।