खूंटी , 22 जुलाई । जिले में पिछले दो दिनों से हुई झमाझम बारिश ने किसानों के चेहरों पर खुशी लौटा दी है। पर्याप्त वर्षा होने से खेतों में पानी भर गया है और अब धान की रोपाई का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। गांव-गांव में खेती-किसानी का माहौल पूरी तरह जीवंत हो उठा है। सुबह होते ही किसान अपने परिवार के साथ खेतों में पहुंच रहे हैं और धनरोपनी के कार्य में जुट जा रहे हैं। इस दौरान खेतों में हर ओर उत्साह और रौनक देखने को मिल रही है।
खेतों में महिलाएं कतारबद्ध होकर धान के बिचड़े रोपती नजर आ रही हैं, जबकि पुरुष किसान खेत तैयार करने, हल चलाने और अन्य कृषि कार्यों में व्यस्त हैं। कई स्थानों पर छोटे बच्चे भी अपने माता-पिता और परिजनों का हाथ बंटाते दिखाई दे रहे हैं।
तोरपा के किसान शिव शंकर साहू और निधिया के रंजीत महतो कहते हैं कि समय पर हुई बारिश से इस वर्ष अच्छी पैदावार की उम्मीद बढ़ गई है। उनका मानना है कि यदि मौसम इसी तरह अनुकूल रहा तो धान की फसल बेहतर होगी और आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
खूंटी जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी वर्षों पुरानी मदईत परंपरा जीवंत है। आधुनिक समय में भी ग्रामीण इस परंपरा को अपनी सबसे बड़ी सामाजिक ताकत मानते हैं। मदईत के तहत गांव के महिला और पुरुष अलग-अलग समूह बनाकर एक-दूसरे के खेतों में श्रमदान करते हैं। धनरोपनी के मौसम में इस परंपरा का महत्व और भी बढ़ जाता है। किसान बारी-बारी से सभी के खेतों में जाकर रोपाई का काम पूरा कराते हैं, जिससे कम समय में अधिक खेतों की रोपाई संभव हो पाती है।
इस सहयोग के बदले किसी प्रकार की मजदूरी नहीं ली जाती। कार्य पूरा होने के बाद संबंधित किसान अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करने वाले ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था करता है। ग्रामीणों का कहना है कि मदईत केवल खेती का तरीका नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यही परंपरा गांवों में सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा रही है।
