रांची, 09 जून । पूर्व मंत्री और तमाड़ के तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड मामले में वर्ष 2016 से जेल में बंद नक्सली राम मोहन सिंह मुंडा उर्फ मोचू को झारखंड उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। मामले में सरकारी गवाह (एप्रूवर) बन चुके राम मोहन सिंह मुंडा को लगभग दस वर्ष बाद जमानत मिल गई है।
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने उसकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए रिहाई का आदेश दिया। मामले की सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरव कुमार ने पक्ष रखा।
राम मोहन सिंह मुंडा पर नक्सली साजिश रचने और हत्या में शामिल होने का आरोप है। यह मामला बुंडू थाना कांड संख्या 65/2008 से संबंधित है।
उल्लेखनीय है कि 9 जुलाई 2008 को तमाड़ के तत्कालीन विधायक और पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की नक्सलियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए बाद में मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई थी।
जांच के दौरान राम मोहन सिंह मुंडा को 8 जुलाई 2016 को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से वह लगातार न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था। जांच एजेंसी ने 23 नवंबर 2017 को उसे एप्रूवर यानी सरकारी गवाह बना लिया था।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपित अब सरकारी गवाह बन चुका है और मामले में उसका बयान भी दर्ज हो चुका है। साथ ही मुकदमे की सुनवाई लंबे समय से चल रही है, जिसके कारण उसे अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा।
वहीं एनआईए की ओर से अदालत को बताया गया कि कानून के प्रावधानों के अनुसार किसी एप्रूवर को मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक हिरासत में रखा जाना आवश्यक माना जाता है। एजेंसी ने इस आधार पर जमानत का विरोध किया।
हालांकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने राम मोहन सिंह मुंडा को जमानत प्रदान कर दी। अदालत के इस फैसले को मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस चर्चित हत्याकांड में पूर्व मंत्री राजा पीटर और कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ अभी भी ट्रायल जारी है। मामले की सुनवाई विशेष अदालत में चल रही है।
