कोलकाता, 21 सितंबर । पिछली सरकार की अदूरदर्शिता और केंद्रीय योजनाओं के बहिष्कार की टकराव वाली राजनीति को पीछे छोड़ते हुए, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार के साथ पूर्ण समन्वय का स्पष्ट संदेश दिया है। सोमवार को केंद्रीय मत्स्य पालन एवं पशुपालन मंत्री राजीव रंजन सिंह की उपस्थिति में डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चली उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने इस नई विकास रूपरेखा का खुलासा किया। बैठक के अंत में, केंद्र सरकार की ओर से मत्स्य पालन क्षेत्र के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार को लगभग नौ करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का चेक सौंपा गया। इस दौरान पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार पर केंद्रीय सहायता के अवसरों को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नई सरकार के गठन के मात्र चार महीनों के भीतर राज्य में केंद्र की सभी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया है।
बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि बंगाल की खाड़ी और सुंदरबन के विशाल तटीय क्षेत्रों, खारे पानी (ब्रैकिश वाटर) में मछली पालन और कालिम्पोंग तथा दार्जिलिंग जैसे पहाड़ी इलाकों में ठंडे पानी में मछली पालन पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए नई कार्ययोजना तैयार की गई है। मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से त्वरित ऋण प्रदान करने, ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ के तहत बड़ी संख्या में मछुआरों को पंजीकृत करने और लंबित बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने पर अहम निर्णय लिए गए हैं।
पिछली सरकार की उदासीनता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि संकीर्ण राजनीति के कारण पूर्व सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकों में केवल खानापूर्ति के लिए उप-निदेशक स्तर के अधिकारियों को भेज दिया जाता था, जिनके पास जमीनी हकीकत की कोई जानकारी नहीं होती थी। हालांकि, नई सरकार आने के बाद पिछले चार महीनों में पूरी तस्वीर बदल गई है। राज्य के मत्स्य विभाग के पोर्टल पर अब तक दो 80 हजार आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और एक लाख 20 हजार मछुआरों का पंजीकरण कार्य पूरा हो चुका है।
राज्य में मत्स्य व्यवसाय की अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री द्वारा बताए गए हैदराबाद के एक युवा उद्यमी का उदाहरण दिया, जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्पादित मछलियों को मुंबई, अहमदाबाद और दिल्ली के पांच और सात सितारा होटलों में आपूर्ति कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि बंगाल की खाड़ी के लंबे तट और राज्य की तमाम नदियों के कारण पश्चिम बंगाल में भी ऐसी ही अपार संभावनाएं मौजूद हैं। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि बांकुड़ा और पुरुलिया जैसे शुष्क जिलों में मछली पालन और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रालय ने छह ‘अमृत सरोवर’ बनाने की मंजूरी भी दे दी है।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह को ‘बड़े भाई’ और एनडीए का वरिष्ठ नेता संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बिहार में जिस तरह से नीतीश कुमार और राजीव रंजन सिंह ने ‘जंगलराज’ को उखाड़ फेंककर सुशासन स्थापित किया था, पश्चिम बंगाल को भी उस अनुभव की सख्त आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अफसोस जताते हुए कहा कि पिछले 50 वर्षों से केंद्र-राज्य टकराव के कारण बंगाल विकास की दौड़ में काफी पिछड़ गया है। उन्होंने दृढ़ संकल्प व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के विजन में बंगाल को एक प्रमुख शिल्पकार बनाने के लिए, केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों से पश्चिम बंगाल को फिर से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
