राजस्थान की लोक-संस्कृति और भक्ति का महासंगम: पारंपरिक परिधानों में उमड़े श्रद्धालु, प्रकाश माली के भजनों और मुन्ना व्यास की कथा से भक्तिमय हुआ माहौल
कोलकाता, 21 सितम्बर। पश्चिम बंगाल की शस्य-श्यामला धरा पर उस समय मरुधरा का अनुपम सौंदर्य, शौर्य और अध्यात्म जीवंत हो उठा, जब रामसा पीर मंडल के तत्वावधान में सोमवार, 21 सितंबर को लोकदेवता बाबा श्री रामदेवजी का भव्य दशमी महोत्सव आयोजित किया गया। 27, बल्लीगंज पार्क, हल्दीराम के समीप स्थित ‘राजेश गणपति बैंक्वेट’ में आयोजित इस महाउत्सव में ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कोलकाता के दिल में राजस्थान का परिवेश ही उतर आया हो। राजस्थानी पारंपरिक परिधानों—रंग-बिरंगी पोशाकों में सज-धजकर पहुंचे श्रद्धालुओं से समूचा परिसर उल्लास, आस्था और सामाजिक समरसता के रंगों से सराबोर नजर आया।
पूजा-अर्चना, अभिषेक और रामसा पीर अमृत कथा का वाचन
—कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल 8:00 बजे विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात् दोपहर 1:15 बजे बाबा रामदेवजी के श्रीचरणों का श्रद्धालुओं द्वारा भक्तिभाव से अभिषेक किया गया। सुबह 10:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक आयोजित ‘रामसा पीर जुम्मा’ (अमृत कथा) में कथा वाचक लक्ष्मीकांत व्यास ‘मुन्नाजी’ (Munna Vyas) ने बाबा रामदेवजी के जीवन, उनके लोककल्याणकारी आदर्शों, सांप्रदायिक सद्भाव और मानव मात्र के प्रति समानता के दिव्य संदेश की महिमा का बखान किया। कथा वाचन ने उपस्थित जनसमूह को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ दिया।

अलौकिक बारात, प्रकाश माली की भजन संध्या और 108 थालों से महाआरती
महोत्सव के तहत शाम 4:30 बजे निकाली गई बाबा की अलौकिक बारात आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। इसके उपरांत शाम 5:30 बजे से आयोजित भव्य भजन संध्या में जोधपुर के सुप्रसिद्ध भजन प्रवाहक प्रकाश माली ने अपनी सुमधुर वाणी में एक से बढ़कर एक भक्ति भजनों की प्रस्तुति देकर समूचे वातावरण को गुंजायमान कर दिया। उनके भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे।
महोत्सव का समापन रात्रि 9:30 बजे 108 थालों से की गई अलौकिक सामूहिक महाआरती से हुआ। महाआरती के दौरान संपूर्ण परिसर जयकारों, शंखध्वनि और भक्तिगीतों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेवजी के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति, समृद्धि और सामाजिक सद्भाव की मंगलकामना की।

प्रेरणादायी विरासत और आयोजन समिति
उल्लेखनीय है कि सामाजिक समरसता के प्रतीक इस रामसा पीर मंडल की स्थापना स्मृतिशेष शंकरलाल अग्रवाल द्वारा की गई थी। इस वर्ष के भव्य आयोजन को ऐतिहासिक बनाने में मंडल के चेयरमैन भीखमचंद पुगालिया, अध्यक्ष प्रह्लाद राय गोयनका, सचिव जुगल राठी एवं संयोजक प्रकाश कुमार डागा सहित समस्त पदाधिकारियों व सदस्यों की सराहनीय भूमिका रही।
कोलकाता की धरती पर आयोजित इस दशमी महोत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि राजस्थान की भक्ति और शौर्य की गौरवशाली परंपराएं सीमाओं से परे जन-जन के हृदयों को आपसी प्रेम, एकता और सेवा के अटूट सूत्र में पिरोने का सशक्त माध्यम हैं।
