जमशेदपुर, 20 सितंबर । झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेएससी – सीजीएल भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। रविवार को जमशेदपुर परिसदन में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा दाखिल हालिया जवाबी हलफनामे से कई नए प्रश्न उत्पन्न हो रहे हैं।
मरांडी ने कहा कि यदि राज्य सरकार अब भर्ती परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को अनियमितताओं और गड़बड़ियों से प्रभावित मान रही है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इससे पहले न्यायालय के समक्ष क्या तथ्य प्रस्तुत किए गए थे। उन्होंने कहा कि सरकार के पूर्व दावों और वर्तमान पक्ष में अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता और बढ़ गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े पूरे मामले की स्वतंत्र समीक्षा कराई जानी चाहिए। उनके अनुसार जांच केवल निचले स्तर के आरोपितों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि परीक्षा के संचालन, निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
मरांडी ने पूर्व में हुई सीआईडी जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अब व्यापक स्तर पर अनियमितताओं की बात सामने आ रही है, तो पहले की जांच में इन तथ्यों का खुलासा क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल हो सके।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार की निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। साथ ही जेएससी – सीजीएल मामले की सीबीआई जांच की मांग दोहराते हुए जेएससी के प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार, सचिव सुधीर गुप्ता तथा सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक को पद से हटाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षा से लाखों युवाओं का भविष्य जुड़ा हुआ है, इसलिए दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।जेएससी – सीजीएल भर्ती परीक्षा से संबंधित मामला वर्तमान में झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है और इसकी अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
