उदयपुर, 7 अगस्त। उदयपुर सिटीजन सोसायटी का मानना है कि पिछले एक दशक में दूसरी बार ब्रिक्स से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठक तथा इससे पूर्व जी-20 की बैठक का उदयपुर में आयोजन इस शहर की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रमाण है। यह गौरव केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत का है। अब आवश्यकता इस वैश्विक विश्वास को स्थायी संस्थागत स्वरूप देने की है।
सोसायटी के अध्यक्ष क्षितिज कुंभट ने शुक्रवार को वक्तव्य जारी कर कहा कि यदि उदयपुर बार-बार विश्वस्तरीय आयोजनों के लिए चुना जा रहा है, तो शहर को उसी स्तर की आधारभूत सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। आज भी हवाई संपर्क सीमित है, रेल सेवाओं का अपेक्षित विस्तार नहीं हुआ है, सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है और शहर बढ़ते ट्रैफिक तथा पार्किंग संकट से जूझ रहा है। विश्वस्तरीय पर्यटन और कूटनीतिक महत्व रखने वाले शहर के लिए यह स्थिति चिंताजनक है।
कुंभट ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि उदयपुर को भविष्य के हाई स्पीड रेल अथवा बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में ठोस पहल दिखाई नहीं देती। देश के प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक और पर्यटन केंद्रों की तरह उदयपुर को भी राष्ट्रीय हाई स्पीड परिवहन नेटवर्क में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इससे पर्यटन, निवेश, व्यापार और रोजगार को नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि उदयपुर सिटीजन सोसायटी भारत सरकार से यह भी आग्रह करती है कि उदयपुर में एक स्थायी “ब्रिक्स सेंटर” की स्थापना का प्रस्ताव सदस्य देशों के समक्ष रखा जाए। यह केंद्र ब्रिक्स देशों के बीच नीति संवाद, आर्थिक सहयोग, नवाचार, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, कौशल विकास, युवा नेतृत्व, अनुसंधान तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाला संस्थागत मंच बन सकता है। लगातार दूसरी बार ब्रिक्स आयोजन की मेजबानी और उपलब्ध अधोसंरचना उदयपुर को इस पहल के लिए स्वाभाविक दावेदार बनाती है।
उन्होंने याद दिलाया कि इतिहास भी इस मांग को मजबूती देता है। मेवाड़ सदियों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, संस्कृति और कूटनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है तथा इसके ऐतिहासिक व्यापारिक संबंध पश्चिम एशिया, विशेषकर फारस (वर्तमान ईरान) तक रहे हैं। आज वही ऐतिहासिक विरासत आधुनिक वैश्विक सहयोग के नए अध्याय का आधार बन सकती है।
सोसायटी अध्यक्ष ने कहा कि उदयपुर केवल आयोजनों का शहर नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक कूटनीति, संस्कृति और पर्यटन का स्थायी केंद्र बनने की क्षमता रखता है। अब समय आ गया है कि उसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान के अनुरूप विकास, संस्थागत निवेश और दीर्घकालिक राष्ट्रीय दृष्टि भी दिखाई दे।
