खूंटी, 24 मई । जिले में पड़ रही प्रचंड गर्मी ने आम जनजीवन को पुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। इन दिनों खूंटी जिले का तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है, जिससे सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं का असर महसूस होने लगा है।
स्थिति यह है कि सुबह 9 बजते ही सड़कों पर वीरानी छा जाती है और लोग जरूरी काम के अलावा घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
भीषण गर्मी के कारण जिले के नदी-नाले, तालाब और छोटे जलस्रोत लगभग सूख चुके हैं। इसका असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पानी की कमी के कारण पशु-पक्षियों को प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में कई कुएं और चापानल भी जवाब देने लगे हैं, जिससे पेयजल संकट और गहरा गया है।
खूंटी शहर की जीवनदायिनी माने जाने वाले तजना जलाशय के पूरी तरह सूख जाने से स्थिति और गंभीर हो गई है। जलाशय सूखने के कारण पूरे शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति व्यवस्था ठप पड़ गई है। इससे हजारों परिवारों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। नगर पंचायत की ओर से टैंकरों के माध्यम से सीमित जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन यह जरूरत के मुकाबले काफी कम साबित हो रही है।
गर्मी और जल संकट से लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई या वैकल्पिक जलापूर्ति की ठोस व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और विकराल हो सकती है। प्रशासन से लोग नियमित जलापूर्ति, सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल व्यवस्था और जल संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
खूंटी शहरी क्षेत्र में आगामी 40 वर्षों में संभावित जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रख कर राज्य के तत्कालीन ग्राम ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने 2018-2019 में 59 करोड़ रुपये की लागत से खूंटी शहरी जलापूर्ति योजना की शुरुआत कराई थी। दो तीन साल में इसे शुरू करना था, पर आठ साल के बाद भी योजना अधर में लटकी हुई है।
इस संबंध में खूंटी नगर पंचायत की अध्यक्ष रानी टूटी कहती हैं कि जलापूर्ति योजना की कार्यकारी एजेंसी को सैकड़ों बार पत्र लिखा गया है। खूंटी के पूर्व विधायक ने भी विधानसभा में मामले को उठाया था, पर कोई सुनने वाला नहीं है।
