टाटा स्टील

पूर्वी सिंहभूम, 10 मई । टाटा स्टील नीदरलैंड-यूरोप की महत्वाकांक्षी शोध परियोजना ‘सीआईएसएमए’ में सक्रिय भूमिका निभा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य पूरी तरह स्क्रैप आधारित और इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) तकनीक के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले स्टील का उत्पादन विकसित करना है, ताकि स्टील उद्योग को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके।

यह पहल यूरोप में सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। परियोजना के तहत ऐसे आधुनिक तकनीकी समाधान विकसित किए जा रहे हैं, जिनसे स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन को बड़े स्तर पर कम किया जा सके।

परियोजना से जुड़े शोधकर्ता डॉ. राधाकांत राणा ने रविवार को बताया कि इस संयुक्त शोध प्रयास से प्राप्त तकनीकी ज्ञान और अनुभव भविष्य में ग्रीन स्टील उत्पादन को नई दिशा देंगे। उन्होंने कहा कि टाटा स्टील पहले से ही उच्च गुणवत्ता वाले स्टील निर्माण में स्क्रैप के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है और सीआईएसएमए परियोजना इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।

डॉ. राधाकांत राणा ने बताया कि इस शोध का मुख्य उद्देश्य 100 प्रतिशत स्क्रैप और इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस तकनीक के माध्यम से शीट स्टील उत्पादन करना है। इससे पारंपरिक स्टील उत्पादन प्रक्रिया की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 70 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं वैश्विक स्तर पर स्टील उद्योग को हरित और टिकाऊ बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी। साथ ही इससे ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।