झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमाार सोनू का निधन

गिरिडीह 6 सितंबर। सुदिव्य कुमार सोनू झारखंड मुक्ति मोर्चा के उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने लंबे समय तक संगठन में काम करने के बाद विधानसभा और फिर कैबिनेट तक का सफर तय किया।

सुदिव्य कुमार सोनू ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ की।उन्‍होंने  अलग झारखंड राज्य के आंदोलन और क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। उनका कहना था कि छात्र जीवन में झारखंड आंदोलन के प्रभाव और शिबू सोरेन से मुलाकात ने उन्‍हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2003 में वे झामुमो के गिरिडीह जिलाध्यक्ष बने।

लगातार चुनाव लड़ते रहे, दो बार मिली हार

सुदिव्य कुमार सोनू ने पहलीबार वर्ष 2009 में तथा दूसरी बार 2014 में गिरिडीह विधानसभा सीट से झामुमो प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। दोनों ही बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हार के बावजूद वे संगठन और  राजनीति में सक्रिय बने रहे।

2019 में हासिल की पहली चुनावी जीत

लगातार दो हार के बाद वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य कुमार सोनू ने भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को 15 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित कर पहली बार गिरिडीह से विधायक बने। विधायक बनने के बाद उन्होंने गिरिडीह में शिक्षा और आधारभूत संरचना से जुड़े कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सर जेसी बोस विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज समेत शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका महत्‍वपूर्ण रही।

दूसरी जीत के बाद बढ़ा राजनीतिक कद

वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य कुमार सोनू ने लगातार दूसरी बार गिरिडीह सीट पर जीत दर्ज की। इस बार भी उनका मुकाबला भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी से हुआ और उन्होंने 3,838 मतों के अंतर से जीत हासिल की। दो लगातार चुनाव जीतने के बाद झामुमो संगठन में उनका कद तेजी से बढ़ा।

24 साल बाद गिरिडीह को मिला मंत्री, रचा राजनीतिक इतिहास

दिसंबर 2024 में हेमंत सोरेन सरकार के दूसरे कार्यकाल में सुदिव्य कुमार सोनू को कैबिनेट में शामिल किया गया। वह गिरिडीह विधानसभा सीट से झामुमो के पहले ऐसे विधायक बने, जिन्हें राज्य मंत्रिमंडल में स्थान मिला। इससे पहले वर्ष 2000 में गिरिडीह के विधायक चंद्रमोहन प्रसाद मंत्री बने थे। इस तरह लगभग 24 वर्षों बाद गिरिडीह को फिर मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिला। मंत्री के रूप में उन्हें नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली।

विधानसभा में मुखर आवाज और संगठन में मजबूत पकड़

सुदिव्य कुमार सोनू की पहचान केवल मंत्री या विधायक के तौर पर नहीं, बल्कि झामुमो के एक सक्रिय संगठनकर्ता के रूप में भी रही। विधानसभा में वे अपनी पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने के लिए जाने जाते थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती थी और पार्टी के महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भूमिका रहती थी। 2026 में जेपीएससी-जेएसएससी को लेकर छात्रों के आंदोलन के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच वार्ता में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अचानक निधन से अधूरा रह गया राजनीतिक सफर

सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर उस समय थम गया, जब वे राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और झामुमो संगठन में भी प्रभावशाली भूमिका निभा रहे थे। उनका आकस्मिक निधन झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ-साथ गिरिडीह की राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।