सुदिव्य कुमार सोनू का कोडरमा से था खास लगाव

 कोडरमा में शोक की लहर

कोडरमा, 06 सितंबर । झारखंड सरकार के मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर से कोडरमा में भी शोक की लहर है। कोडरमा से उनका रिश्ता महज राजनीतिक नहीं था, बल्कि उनके जीवन के शुरुआती वर्ष भी इसी जिले से जुड़े रहे। उनका बचपन झुमरीतिलैया में बीता और उन्होंने यहीं स्थित सीएच उच्च विद्यालय से स्कूली शिक्षा पूरी की। वर्ष 1983 में उन्होंने इसी विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।

उनके पुराने सहपाठियों के अनुसार, स्कूल के दिनों में सुदिव्य कुमार सोनू   बेहद सहज और मिलनसार  स्वभाव के थे।  वे सहपाठियों के साथ घुल-मिलकर रहते थे। उनके निधन की खबर के बाद पुराने साथियों के बीच स्कूल के दिनों की यादें एक बार फिर ताजा हो गईं।

पिता की नौकरी के कारण कोडरमा से जुड़ा परिवार

सुदिव्य कुमार सोनू के पिता शंभूनाथ विश्वकर्मा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, कोडरमा में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे। पिता की नौकरी के कारण परिवार का जुड़ाव कोडरमा से हुआ और इसी दौरान सुदिव्य कुमार का बचपन झुमरीतिलैया में गुजरा। बाद में उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ती गई, लेकिन कोडरमा से उनका लगाव बना रहा।

झामुमो को मजबूत करने में निभाई सक्रिय भूमिका

राजनीतिक जीवन में भी कोडरमा उनके लिए महत्वपूर्ण रहा। जिले में झामुमो के संगठन को मजबूत करने और पार्टी का जनाधार बढ़ाने की रणनीति में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को साधने और मजबूत चेहरों को पार्टी से जोड़ने की दिशा में भी उनकी पहल रही।

करीब सात माह पहले, पांच फरवरी को वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ लोकाई में आयोजित पार्टी कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पिछले दो विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली शालिनी गुप्ता को झामुमो में शामिल कराया था। उनके इस कदम को कोडरमा की राजनीति में पार्टी के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया था।

सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक पहचान भले ही आगे चलकर झारखंड के बड़े राजनीतिक परिदृश्य में बनी, लेकिन उनके जीवन की शुरुआती कहानी में झुमरीतिलैया का खास स्थान रहा। इसी शहर में उन्होंने बचपन बिताया, पढ़ाई की और जीवन की शुरुआती यादें संजोईं।