कोलकाता, 19 मई। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘संस्कृति सौरभ’ की ओर से पद्मभूषण से अलंकृत अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शास्त्रीय गायक पं. अजय चक्रवर्ती को ‘संस्कृति सौरभ सम्मान –2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान शनिवार शाम स्थानीय जी डी बिड़ला सभागार में प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक एवं कोलकाता के शेरिफ़ गौतम घोष के कर-कमलों से प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के आरम्भ में संस्था के संस्थापक अध्यक्ष प्रमोद शाह ने स्वागत वक्तव्य में बंग-भूमि को कला,संगीत,साहित्य,अध्यात्म,संस्कृति और सभ्यता का समुद्र बताते हुए निम्न पंक्तियों से सभी का स्वागत किया –
“सुजला सुफला शस्य श्यामला वसुन्धरा को प्रणाम है
बंकिम, शरद, रवींद्र, बिमल की परम्परा को प्रणाम है
जहाँ खिला अरविन्द योग का, गूँजा बिगुल सुभाष का
परमहंस की माँ काली की बंग-धरा को प्रणाम है”
पं. अजय चक्रवर्ती को गौतम घोष ने संस्था के संरक्षक महावीर प्रसाद मणकसिया,विनोद बागड़ोदिया और उनकी पत्नी श्रीमती आभा की उपस्थिति में, शंख ध्वनि के साथ सम्मान स्वरूप श्रीफल,शॉल,प्रशस्ति -पत्र प्रदान किये। संस्था के उपाध्यक्ष विनीत रुइया ने एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की। संस्थापक एवं कार्यकारिणी सदस्य महेश चंद्र शाह ने माल्य-प्रदान किया ।प्रशस्ति-पत्र का पाठन संस्था के सहसचिव प्रदीप जीवराजका ने किया।
पं. अजय चक्रवर्ती की पत्नी प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत की गायिका श्रीमती चंदना चक्रवर्ती को सदस्या लीला शाह ने शॉल प्रदान किया । संस्था के संस्थापक एवं कार्यकारिणी सदस्य अजय अग्रवाल ने गौतम घोष को शॉल प्रदान किया। कार्यकारिणी सदस्य आनंद मेहता ने उनको स्मृति चिन्ह प्रदान किया। विशिष्ठ अतिथि महान नृत्यांगना आलोका नंदा राय का बुके देकर स्वागत किया गया। आरम्भ में कार्यकारिणी सदस्य सरिता बेंगाणी और सदस्य लीला शाह,सरिता सोंथलिया एवं मंजु बरड़िया ने तिलक लगाकर अतिथियों का स्वागत किया।राजेंद्र खंडेलवाल और शशि खंडेलवाल ने मुख्य अतिथियों की अगुआई की। सहसचिव सुभाष सोंथलिया एवं कोषाध्यक्ष जतन बरड़िया ने अतिथियों को बुके प्रदान किया ।
यह सम्मान गत वर्षों में उर्दू के मशहूर शाइर और आलोचक शीन काफ़ निज़ाम साहब,नृत्य सम्राट पं.बिरजू महाराज,संगीत मार्तण्ड पं.जसराज,प्रख्यात साहित्यकार डॉ. कृष्ण बिहारी मिश्र,बांसुरी सम्राट पं.हरि प्रसाद चौरसिया,बाउल सम्राट पं पूर्णदास,घटक के भगवान् विक्कु विनायक्रम को दिया जा चुका है।
पं. अजय चक्रवर्ती ने इस सम्मान को अपने गुरुओं,विशेष कर अपने पिता स्व.अजित कुमार ,स्व.पं. ज्ञान प्रकाश घोष और अपनी पत्नी चंदना जी को समर्पित किया।अपने वक्तव्य में उन्होंने गौतम घोष की खूब प्रशंसा की। साथ ही संस्कृति सौरभ के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए इसे सौ साल तक इसी तरह सक्रिय रहने का आशीर्वाद दिया।उन्होंने वेदों की ऋचाओं का मंत्रोचारण भी किया। उनसे पहले गौतम घोष ने बंगाल की महान संस्कृति की चर्चा करते हुए
पंडित जी की संगीत साधना को नमन किया।संस्कृति सौरभ की सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों की सराहना की। चंदना जी ने अपने वक्तव्य में ऐसे सम्मान हेतु संस्था की प्रशंसा की और श्रोताओं के निवेदन पर बांग्ला में दो पँक्तियाँ गाईं।सभी ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया।
पंडित जी के मेधावी शिष्य अनुभाव खामारू ने मधुर गायन प्रस्तुत किया।हारमोनियम एवं तबले पर उनकी संगत ज्योतिर्मय बनर्जी एवं सौमन सरकार ने की। इस जुगलबंदी ने श्रोताओं का दिल जीत लिया। इन कलाकारों को कार्यकारिणी सदस्य मुकेश खेतान, विकास रुंगटा एवं संदीप अग्रवाल ने बुके प्रदान किये।
आरम्भ में संस्था के सचिव नौलखा ने संस्था के उद्देश्य एवं गतिविधियों से परिचित करवाया और कार्यक्रम का संचालन किया। उपाध्यक्ष विनीत रुइया ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
महानगर के कलाप्रेमियों,रसिक श्रोताओं,पंडित जी के शिष्य-शिष्याओं और संस्कृति सौरभ के सदस्यों सहित सभागार में अच्छी संख्या में श्रोताओं की उपस्थिति ने इसे एक स्मरणीय अनुष्ठान बना दिया।
