पीएलवी को गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का निर्देश, महिलाओं को न्याय और जरूरतमंदों को मुफ्त विधिक सहायता पर भी जोर
रांची, 23 मई। अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के अधिकारों को मजबूत बनाने और लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की ओर से पारा लीगल वॉलंटियर (पीएलवी) के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। डालसा सचिव की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में जिले के करीब 180 कार्यरत पीएलवी ने भाग लिया।
बैठक में पेसा कानून-2025 के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। सचिव ने पीएलवी को निर्देश दिया कि वे गांवों और कस्बों में जाकर आम लोगों को इस कानून के बारे में जागरूक करें, ताकि अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपने अधिकारों को बेहतर तरीके से समझ सकें और उनका उपयोग कर सकें।
बैठक के दौरान बताया गया कि पेसा कानून-2025 के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में खनन, भूमि अधिग्रहण तथा बड़ी विकास परियोजनाओं को लागू करने से पहले ग्राम सभा की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा स्थानीय हाट-बाजार, जलस्रोतों और वन उपज के प्रबंधन का अधिकार भी ग्राम सभाओं को प्रदान किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि यह कानून स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
डालसा सचिव ने कहा कि पीएलवी समाज और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि पेसा कानून-2025 के प्रभावी क्रियान्वयन से अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की भागीदारी और अधिकार दोनों मजबूत होंगे।
कार्यक्रम में पीड़ित महिलाओं को मुआवजा दिलाने, जरूरतमंद लोगों को मुफ्त विधिक सहायता उपलब्ध कराने और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि कानूनी जागरूकता के माध्यम से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को न्याय दिलाने का प्रयास लगातार जारी रहेगा।
इस अवसर पर एलएडीसी सदस्यों ने भी पेसा कानून-2025 की विस्तृत जानकारी साझा की और पीएलवी को कानून के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाकर लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सजग किया जाएगा, ताकि समाज में न्याय और सहभागिता की भावना मजबूत हो सके।
