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कोलकाता, 08 जुलाई । पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 वर्षीय नाबालिग छात्रा से कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता की सड़कों पर रैली निकाली है। मुख्य आरोपित प्रभास मंडल की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद राज्य की राजनीति और गरमा गई है। बुधवार को इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले पर उनसे सवाल न पूछे जाएं, बल्कि मुख्यमंत्री से जवाब मांगा जाए। इसी दौरान उन्होंने अपनी पार्टी की रैली में हुई हिंसा, पुलिस की भूमिका, कानून-व्यवस्था और भाजपा पर भी जमकर हमला बोला।

बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय की अनुमति के बाद ममता समर्थक तृणमूल कांग्रेस के छात्र और युवा संगठनों की ओर से दक्षिण कोलकाता के बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ तक विरोध मार्च निकाला गया। अदालत ने दोपहर दो बजे से शाम चार बजे तक रैली की अनुमति दी थी। लेकिन रैली शुरू होने के कुछ ही देर बाद बालीगंज इलाके में तनाव फैल गया। तृणमूल का आरोप है कि रैली के किनारे से गुजर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं ने “चोर-चोर” के नारे लगाए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और देखते ही देखते हाथापाई शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और कई स्थानों पर लाठीचार्ज भी करना पड़ा।

रैली समाप्त होने के बाद कालीघाट स्थित अपने आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान जब ममता बनर्जी से बारुईपुर मुठभेड़ में प्रभास मंडल की मौत पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “इस तरह के सवाल मुझसे मत पूछिए। जाइए, मुख्यमंत्री से पूछिए।”

इसके बाद उन्होंने कालीघाट स्थित अपने आवास के बाहर पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनके घर के बाहर लगातार निगरानी रखी जा रही है। कौन आ रहा है, कौन जा रहा है, इस पर नजर रखी जाती है। यहां तक कि अब मीडिया को भी आसानी से अंदर नहीं जाने दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लगभग “हाउस अरेस्ट” जैसी स्थिति में रखा गया है।

ममता ने कहा, “सब जानते हैं कि आप सत्ता में कैसे आए। फिर भी मैं कहूंगी कि सरकार ठीक से चलाइए, कानून-व्यवस्था बनाए रखिए और लोगों को न्याय दीजिए। मेरे घर के सामने पुलिस निगरानी करती है। जहां महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं, वहां पुलिस नजर नहीं आती, लेकिन हमारे घर और कार्यालय की निगरानी में पूरी ताकत लगा दी जाती है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट से हैंड माइक के साथ रैली निकालने की अनुमति मिलने के बावजूद प्रशासन ने सहयोग नहीं किया। उनके अनुसार, सुबह छह बजे से ही इलाके में तेज आवाज में डीजे बजाया गया, जिससे पूरे क्षेत्र का माहौल खराब किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जानबूझकर रैली को प्रभावित करने की कोशिश की।

ममता बनर्जी ने कहा कि हाई कोर्ट की स्पष्ट अनुमति के बावजूद पुलिस ने रैली के दौरान अदालत के आदेश का पालन नहीं कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस चाहती तो पूरी रैली शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकती थी, लेकिन उसने भाजपा कार्यकर्ताओं को गुंडागर्दी करने की खुली छूट दे दी। उन्होंने कहा कि पुलिस लोगों की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल रही और यह अदालत की अवमानना का मामला है।

उन्होंने कहा, “हमारे लड़के-लड़कियां हाई कोर्ट की अनुमति लेकर रैली में शामिल हुए थे। फिर भी उन पर हमला हुआ। पुलिस ने सुरक्षा देने के बजाय मूकदर्शक की भूमिका निभाई। पुलिस जब जानती थी कि यह रैली अदालत के आदेश से हो रही है, तब भी उसने अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई?”

ममता ने दावा किया कि सुबह से पूरे इलाके में अराजकता का माहौल बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिला कार्यकर्ताओं के साथ भी मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर उनकी पार्टी एक बार फिर कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।

भाजपा पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा, “जो लोग राम के नाम पर पैसे लूटते हैं, जो लोग दानपेटियों का पैसा चुराते हैं, वही आज राम के नाम पर नारे लगाकर भगवान राम का अपमान कर रहे हैं। मैं उनसे कहना चाहती हूं कि राम का नाम बदनाम मत करो।”

ममता की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान और अन्य धार्मिक संस्थानों की दान राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। उनके अनुसार, राज्य के हालात उत्तर प्रदेश से भी बदतर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को सुरक्षा नहीं मिल रही और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना भी मुश्किल बना दिया गया है।