राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने दिए शीघ्र कार्यवाही के निर्देश
जयपुर, 29 जुलाई। राजस्थान में राजस्थानी भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं अकादमिक अध्ययन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति के सचिवालय ने राज्य के सभी प्रमुख राज्य वित्तपोषित विश्वविद्यालयों को ‘राजस्थानी भाषा अध्ययन केन्द्र’ स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में सचिवालय द्वारा 20 जुलाई 2026 को सभी कुलपतियों को आधिकारिक पत्र भेजा गया है।
जारी निर्देशों के अनुसार राज्यपाल एवं कुलाधिपति का मानना है कि राजस्थानी भाषा राजस्थान के विशाल भू-भाग में बोली जाने वाली प्रमुख भाषा है। यह केवल संचार का माध्यम ही नहीं, बल्कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, साहित्य और सामाजिक पहचान का भी प्रतिनिधित्व करती है। इसी दृष्टि से प्रदेश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा अध्ययन केन्द्र स्थापित किए जाने का निर्णय लिया गया है।
मान्यता बिना खुशी अधूरी
राजस्थानी प्रचारिणी सभा के उपाध्यक्ष, समाजसेवी एवं उद्योगपति प्रहलाद राय गोयनका ने इस आदेश पर प्रसन्नता व्यक्त की है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि यह प्रसन्नता अभी अधूरी है, जब तक राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं मिल जाती तब तक इसके लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे राजस्थानी बोलने वालों को पूर्ण प्रसन्नता नहीं होगी। हालांकि, राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र इस दिशा में एक पड़ाव है जो आगे राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलवाने की राह प्रशस्त करेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनी आधार
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा और अनुसंधान को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई है। ऐसे में राजस्थानी भाषा के अध्ययन, शोध, दस्तावेजीकरण तथा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को संस्थागत स्वरूप देने के उद्देश्य से इन अध्ययन केन्द्रों की स्थापना आवश्यक मानी गई है।
राज्यपाल सचिवालय ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने संस्थानों में अध्ययन केन्द्र स्थापित करने की प्रक्रिया अविलंब प्रारम्भ करें तथा अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सचिवालय को भेजना सुनिश्चित करें, जिससे राज्यपाल एवं कुलाधिपति को प्रगति से अवगत कराया जा सके।
इन विश्वविद्यालयों को निर्देश
जिन विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए गए उनमें
- राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर
- जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर
- मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर
- महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर
- कोटा विश्वविद्यालय, कोटा
- महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर
- वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा
- गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा
- पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर
- महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर
- राजऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर
शामिल हैं।
इस पहल का उद्देश्य राजस्थानी भाषा के संरक्षण, उसके साहित्य, इतिहास, लोक संस्कृति और लोक परंपराओं पर शोध को प्रोत्साहन देना, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को अध्ययन के नए अवसर उपलब्ध कराना तथा मातृभाषा आधारित शिक्षा को मजबूत करना है। अध्ययन केन्द्र स्थापित होने के बाद विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा से जुड़े पाठ्यक्रम, शोध परियोजनाएं, संगोष्ठियां, कार्यशालाएं तथा साहित्यिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
