झारखंड उच्‍च न्‍यायालय

रांची, 21 जुलाई । स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मीना कुमारी मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की लेटर्स पेटेंट अपील (एलपीए) पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित अवमानना याचिका की सुनवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार, जेएसएससी और अन्य पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले से जुड़ी सभी लंबित एलपीए को एक साथ जोड़कर सुनवाई करने का निर्देश दिया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को निर्धारित की है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स, शेखर प्रसाद गुप्ता और शुभम मिश्रा ने अदालत को बताया कि स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 के तहत 17,786 स्वीकृत पदों के विरुद्ध अब तक केवल 12,046 पदों पर ही नियुक्तियां की गई हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने योग्य और निर्धारित अर्हता पूरी करने वाले 2,034 अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। उनका तर्क था कि इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति का लाभ मिलना चाहिए।

वहीं, जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय की एकल पीठ के आदेश के आलोक में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की है। आयोग का यह भी कहना था कि एकल पीठ का आदेश उच्चतम न्यायालय के पूर्व आदेशों के विपरीत है, इसलिए उसे चुनौती दी गई है।

मामले में जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित सिन्हा ने अदालत में अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार और जेएसएससी को निर्देश दिया कि इस विवाद से संबंधित सभी लंबित अपीलों का विवरण और केस नंबरों की सूची अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए, ताकि सभी मामलों की एक साथ सुनवाई कर व्यापक निर्णय लिया जा सके।

अदालत के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल इस मामले से जुड़ी अवमानना कार्यवाही अगले आदेश तक स्थगित रहेगी, जबकि नियुक्ति विवाद पर विस्तृत सुनवाई अब 12 अगस्त को होगी।