कोलकाता, 18 फ़रवरी।
भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। अमित मालवीय ने मुख्यमंत्री के उस दावे को “भ्रामक” बताया, जिसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग द्वारा निलंबित सात सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) को राज्य सरकार के अन्य कार्यों में “समाहित” करने की बात कही थी।
अमित मालवीय ने कहा कि इन अधिकारियों का निलंबन निर्वाचन आयोग की संवैधानिक शक्तियों के तहत हुआ है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 21 सितंबर 2000 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारी उस अवधि में पूरी तरह निर्वाचन आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासनात्मक अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कानून की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13सीसी और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 28ए के तहत चुनावी कार्यों में लगे अधिकारियों पर निर्वाचन आयोग का पूर्ण अधिकार स्थापित है, जिसमें अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की शक्ति भी शामिल है।
अमित मालवीय ने जोर देकर कहा कि कोई भी राज्य सरकार इस संवैधानिक और वैधानिक व्यवस्था को कमजोर या दरकिनार नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को संविधान और कानून के अनुसार ही कार्य करना चाहिए और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता किसी भी राजनीतिक सुविधा से ऊपर है।
अपने पोस्ट में उन्होंने चेतावनी दी कि निर्वाचन आयोग के अधिकार में हस्तक्षेप करने या उसे कमजोर करने के प्रयास स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की बुनियाद पर सीधा हमला हैं। उन्होंने कहा, “संस्थाएं महत्वपूर्ण हैं, कानून का शासन महत्वपूर्ण है और हर सार्वजनिक सेवक की पहली निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए, न कि अस्थायी राजनीतिक दबावों के प्रति।”
इस मुद्दे पर राज्य सरकार या निर्वाचन आयोग की ओर से खबर लिखे जाने तक तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
