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विष्णुपुर, 18 फरवरी ।

बांकुड़ा जिले के ऐतिहासिक नगर विष्णुपुर स्थित प्राचीन सांडेश्वर शिव मंदिर में लगभग छह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बुधवार को विशेष अनुष्ठानों की शुरुआत होते ही भक्तों का इंतजार समाप्त हो गया। “जय बाबा सांडेश्वर” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

मंदिर के लंबे समय तक बंद रहने का मुख्य कारण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया गया व्यापक संरक्षण और जीर्णोद्धार कार्य था। मंदिर की प्राचीन लेटराइट पत्थर की संरचना समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गई थी और नींव बैठने से ढांचे को खतरा उत्पन्न हो गया था।

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2019-20 के आसपास एएसआई कोलकाता सर्कल ने मंदिर की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण कार्य प्रारंभ किया। तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में मंदिर को सावधानीपूर्वक विखंडित कर उसके पत्थरों को चिह्नित किया गया, नई सुदृढ़ नींव डाली गई और पुनः उसी मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित किया गया। नदी तट के समीप स्थित होने के कारण नींव को विशेष रूप से मजबूत किया गया।

जीर्णोद्धार कार्य के दौरान गाजन जैसे पारंपरिक उत्सवों में भी सीमित रूप से पूजा की अनुमति थी। अब संरक्षण कार्य पूर्ण होने के बाद मंदिर पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है।

इतिहासकारों के अनुसार, सांडेश्वर मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है। यह मंदिर मल्ल राजवंश के प्रारंभिक काल से जुड़ा हुआ है और 10वीं–11वीं शताब्दी के आसपास इसकी स्थापना मानी जाती है। विष्णुपुर की प्रसिद्ध टेराकोटा शैली से भिन्न यह मंदिर लेटराइट पत्थरों से निर्मित है, जो इसे अन्य मंदिरों से अधिक प्राचीन और विशिष्ट बनाता है। स्थानीय मान्यता है कि बाबा सांडेश्वर क्षेत्र के रक्षक देवता हैं और यहां की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं।

बुधवार को विशेष तिथि के अवसर पर अभिषेक, रुद्र पाठ और महाभोग का आयोजन किया गया। प्रातःकाल से ही महिला श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। अनेक भक्तों ने पहले द्वारकेश्वर नदी में स्नान कर पूजा-अर्चना की और उसके बाद मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि विशेष अभिषेक एवं महाभोग का आयोजन श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुरूप किया गया है। आयोजन में स्थानीय लोक परंपराओं और ‘गाजन’ उत्सव की झलक भी देखने को मिली, जिससे धार्मिक वातावरण में सांस्कृतिक रंग घुल गया है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। पुलिस बल एवं स्वयंसेवक जगह-जगह तैनात हैं। मंदिर परिसर के आसपास अस्थायी दुकानों और स्टॉलों के कारण मेले जैसा दृश्य उत्पन्न हो गया है, जिससे स्थानीय व्यापारियों में भी उत्साह है।

स्थानीय निवासी हरिपाल लोध ने कहा कि बाबा सांडेश्वर की महिमा अपरंपार है और वर्षों बाद पुनः मंदिर के द्वार खुलना क्षेत्रवासियों के लिए भावनात्मक क्षण है। देर शाम तक भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना जारी रहने की संभावना है।