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उदयपुर, 2 जनवरी। केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि केवल ज्ञान या डिग्री से ही समाज और राष्ट्र का निर्माण नहीं होता, बल्कि ज्ञान के साथ संस्कार का होना अनिवार्य है। जब शिक्षा संस्कारों से कट जाती है, तब वही ज्ञान समाज के लिए खतरा भी बन सकता है।
वे शुक्रवार को उदयपुर में विद्या प्रचारिणी सभा एवं बीएन संस्थान के 104वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम धमाके का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना में ऐसे लोगों के नाम सामने आए, जिन्हें समाज में शिक्षित और सम्मानित वर्ग माना जाता था। उन्होंने कहा कि वे डॉक्टर अपनी पर्चियों पर आरएक्स लिखते थे, लेकिन उनके पास आरडीएक्स मिला। यह उदाहरण बताता है कि केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है, उसके साथ संस्कार और नैतिकता का होना भी उतना ही जरूरी है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज देश विश्वास संकट से गुजर रहा है, इसका मूल कारण राजनीति, व्यवस्था और सामाजिक जीवन में मूल्यों का क्षरण है। भारत की राजनीति और नेताओं के प्रति जनता का विश्वास कमजोर हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेताओं के कथन और आचरण में अंतर इस अविश्वास का सबसे बड़ा कारण है। इसी कारण वे अपने राजनीतिक जीवन में कभी ऐसे आश्वासन नहीं देते, जिन्हें निभाया न जा सके। उन्होंने कहा कि इस विश्वास संकट को चुनौती के रूप में स्वीकार कर राजनीति को मूल्यों से जोड़ना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और वर्ष 2030 तक विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान बनाएगा। रक्षा क्षेत्र में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है और हथियार निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन आज भारत की यह स्थिति है कि जब वह बोलता है तो पूरी दुनिया सुनती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि उनके भीतर का शिक्षक आज भी जीवित है और राजनीति में उनका प्रवेश एक संयोग मात्र रहा है। उन्होंने इसे ‘हर-हर गंगे’ वाले उदाहरण से जोड़ते हुए कहा कि जैसे कोई व्यक्ति गंगा स्नान का इच्छुक न होकर भी फिसलकर गंगा में गिर जाए, वैसे ही उनका राजनीति में आना भी अप्रत्याशित रहा।
उदयपुर में सैनिक स्कूल की मांग पर राजनाथ सिंह ने कहा कि बीएन संस्थान के दोनों विद्यालयों के लिए निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि वे इस विषय को गंभीरता से देखेंगे और अपनी ओर से हरसंभव प्रयास करेंगे, हालांकि बिना ठोस आधार के आश्वासन देना उनकी कार्यशैली का हिस्सा नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस शैक्षणिक मंच पर बैठकर उन्हें विशेष सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हो रहा है। उन्होंने बताया कि वे देश की 60 से अधिक विश्वविद्यालयों के कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं, लेकिन यहां जैसा भावनात्मक और बौद्धिक वातावरण कहीं और अनुभव नहीं हुआ। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य अपनी कृतियों से विभूषित होता है और स्वाभिमान तथा अहंकार के बीच की रेखा बहुत सूक्ष्म होती है, जिसे समझना आवश्यक है।
नई शिक्षा नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इसमें शिक्षा के साथ ज्ञान और संस्कार को केंद्र में रखा गया है तथा शिक्षकों को विशेष महत्व दिया गया है। 2018 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 54 प्रतिशत अभिभावक अपने बच्चों को शिक्षक बनाना चाहते हैं, क्योंकि समाज में शिक्षकों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक के गुणों का मूल्यांकन किया जा सकता है, लेकिन उनके प्रति सम्मान का भाव सदैव बना रहना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों की सामूहिक भोजन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परंपरा समानता, अनुशासन और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वे प्रोटोकॉल से इतर जाकर सहज वातावरण में लोगों से संवाद करना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करता है और प्राचीन काल से देश की व्यवस्थाएं समृद्ध रही हैं।
कार्यक्रम में मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य एवं नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने बालिका शिक्षा तथा संस्थान के विकास में राजपरिवार के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बिना नाम लिए राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया पर इशारों में तंज कसते हुए कहा कि महापुरुषों के नाम का राजनीति में दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और उनके बारे में हल्के ढंग से टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। माना जा रहा है कि यह टिप्पणी हाल ही में महाराणा प्रताप को लेकर दिए गए बयान की पृष्ठभूमि में की गई।
प्रारंभ में संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि रक्षा मंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन करते हुए आयातक से निर्यातक राष्ट्र की पहचान बनाई है। यह बदलाव आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सशक्त कदम है, जिससे सुरक्षा सुदृढ़ हुई है और युवाओं के लिए नवाचार, अनुसंधान व रोजगार के नए अवसर बने हैं। उन्होंने संस्थान के निर्माण में योगदान देने वाले पुरोधाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। समारोह में उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत, चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी. जोशी भी मंचासीन थे।
समारोह के उपरांत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सिटी पैलेस पहुंचे, जहां मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह ने उनका गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया।