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पूर्वी सिंहभूम, 14 अक्टूबर ।

डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), जमशेदपुर शाखा सहित कई चिकित्सा संगठनों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संगठनों ने सरकार और प्रशासन को मांगों पर कार्रवाई के लिए समय देते हुए चेतावनी दी है कि समस्याओं का समाधान नहीं होने पर 21 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा और 22 अक्टूबर को पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा। आंदोलन के पहले चरण में 13 से 20 अक्टूबर तक डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी काली पट्टी पहनकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।

इसी क्रम में 14 अक्टूबर को जिला मुख्यालय में विभिन्न चिकित्सा संगठनों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर जिला प्रशासन को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपने गया। ज्ञापन में सरकारी चिकित्सकों की सेवा शर्तों में सुधार, पदोन्नति और करियर में प्रगति के अवसर, लंबित वेतन एवं अन्य बकाया भुगतान तथा संविदा पर कार्यरत डॉक्टरों की समस्याओं के समाधान की मांग की गई है। संगठनों ने स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।

चिकित्सा संगठनों ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के लंबित दावों का शीघ्र भुगतान करने की मांग की। उनका कहना है कि पैकेज दरों से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के साथ अस्पतालों के भुगतान के लिए स्थायी, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि अस्पतालों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े।

ज्ञापन में जूनियर डॉक्टरों की नियुक्ति, संविदा सेवा, सेवा शर्तों और प्रशिक्षण से संबंधित समस्याओं को भी शामिल किया गया है। चिकित्सा संगठनों ने मेडिकल छात्रों को स्टाइपेंड का समय पर भुगतान करने, मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा बेहतर शैक्षणिक और क्लिनिकल प्रशिक्षण की व्यवस्था करने की मांग की है। इसके अलावा डेंटल डॉक्टरों के लिए केंद्र सरकार और बिहार मॉडल की तर्ज पर डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) लागू करने, आवश्यक नियम बनाने और स्वीकृत पदों पर पारदर्शी नियुक्तियां करने की मांग भी उठाई गई है। लागू नियमों के तहत पात्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के चिकित्सकों के मामलों पर विचार करने का आग्रह किया गया है।

चिकित्सा संगठनों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, आईएमए और अन्य मान्यता प्राप्त संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए नियमित संवाद और समीक्षा तंत्र स्थापित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याओं का समय पर समाधान करने और लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन की निगरानी में मदद मिलेगी।

संगठनों ने जिला प्रशासन से अपने अधिकार क्षेत्र की मांगों पर उचित कार्रवाई करने तथा राज्य स्तर से जुड़े नीतिगत मामलों को संबंधित सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाने का अनुरोध किया है। चिकित्सा संगठनों को उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन समय रहते सकारात्मक पहल करेंगे, ताकि आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़े और मरीजों को भी किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।