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कोलकाता, 14 अक्टूबर। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव में दुर्गापूजा पंडाल के पासमार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को पुस्तक स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं मिलने के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि पुस्तक स्टॉल लगाने में आखिर क्या परेशानी है? उन्होंने कहा, “वहां कोई लॉटरी की दुकान तो नहीं लगाएंगे, पुस्तक की दुकान लगाएंगे। इसमें क्या परेशानी है?” अदालत ने यह भी कहा कि विपक्षी राजनीतिक दलों की आवाज नहीं दबाई जानी चाहिए।

माकपा ने अदालत में दावा किया कि वह कई वर्षों से वहां पुस्तक स्टॉल लगाती रही है, लेकिन इस बार उसे अनुमति नहीं दी गई, जबकि हिंदू जागरण मंच समेत अन्य संगठनों को स्टॉल लगाने की अनुमति मिली है।

सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता सुरजीतनाथ मित्र ने दलील दी कि मामला पुलिस की निष्क्रियता या अतिसक्रियता से संबंधित नहीं है, इसलिए न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ में इसकी सुनवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि माकपा ने स्टॉल लगाने के लिए उपमंडलाधिकारी (एसडीओ) से अनुमति मांगी थी, जबकि संबंधित जमीन लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन है। ऐसे में पार्टी को विभाग से अनुमति लेनी चाहिए थी। महाधिवक्ता ने मामले को संबंधित पीठ में भेजने का अनुरोध किया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि वह मामले की सुनवाई जारी रखने या इसे दूसरी पीठ में भेजने पर विचार करेंगे। हालांकि, इससे पहले उन्होंने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। अदालत जानना चाहती है कि लोक निर्माण विभाग की अनुमति से वहां किन-किन संगठनों को पुस्तक स्टॉल लगाने की अनुमति दी गई है।

गाैरतलब है कि, इसी मामले में दुर्गा पूजा के दौरान नैहाटी और बनगांव में माकपा के अस्थायी बुक स्टॉल लगाने में बाधा डालने के मामले में उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए मंगलवार को राज्य सरकार से 24 घंटे के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।

हाल ही में, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कम्युनिस्टों के बुक स्टॉल को लेकर एक सख्त निर्देश जारी किया था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि यदि वामपंथी दल अपने स्टॉल पर ‘शारदोत्सव’ के बजाय ‘दुर्गा पूजा’ नहीं लिखते हैं, तो उन्हें एक भी स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।