कोलकाता, 14 अक्टूबर । पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से तृणमूल कांग्रेस की लाेकसभा सांसद महुआ मोइत्रा की सुरक्षा से जुड़े मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। बुधवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने निर्देश दिया कि 15 अक्टूबर तक गृह मंत्रालय को इस मामले में पक्षकार बनाया जाए।
इससे पहले एक अन्य मामले में उच्च न्यायालय ने उनके लोकसभा क्षेत्र में आवागमन के दौरान दो सुरक्षाकर्मी तैनात करने का निर्देश दिया था। बीते 7 अक्टूबर को अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा था। साथ ही, न्यायमूर्ति ने राज्य से यह बताने को कहा था कि किसी सांसद की सुरक्षा के लिए क्या नियम निर्धारित हैं।
सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि उनके लोकसभा क्षेत्र में बार-बार असामाजिक तत्व उन्हें निशाना बना रहे हैं। कभी पार्टी कार्यालय में रहते हुए उन पर अंडे फेंके गए, तो कभी कार से आने-जाने के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। इससे पहले उच्च न्यायालय ने उन्हें उनके लोकसभा क्षेत्र में पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया था। हालांकि, महुआ का आरोप है कि इसके बावजूद उन पर हमले हुए हैं।
अब महुआ ने 24 घंटे सुरक्षा कर्मी तैनात करने की मांग की है।
बुधवार को राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) राजदीप मजूमदार ने अदालत में इस संबंध में रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और सांसदों की सुरक्षा से संबंधित येलो बुक के प्रावधानों के अनुसार महुआ को सुरक्षा दी जा रही है। येलो बुक के प्रावधानों के तहत उन्हें एक्स श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है।
वहीं, महुआ के वकील अर्क नाग ने अदालत में दलील दी कि उनकी मुवक्किल की सुरक्षा के लिए एक निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) तैनात है, लेकिन वह हर समय उनके साथ नहीं रहता। हमलों के बाद सांसद ने अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है। वकील ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय भी कदम उठा सकता है, इसलिए उसे भी पक्षकार बनाने की अनुमति दी जाए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति ने महुआ के वकील की मांग स्वीकार करते हुए गृह मंत्रालय को मामले में पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी। मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी।
