कोलकाता, 01 अक्टूबर । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान राजनीतिक शिष्टाचार की सीमाएं याद दिलाते हुए विपक्षी नेताओं पर तीखा प्रहार किया है। रेजीनगर के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति में लड़ाई, तर्क, नीतिगत चर्चा और आलोचना हमेशा रहेगी, लेकिन कोई हर शुक्रवार को नमाज में उनके विमान दुर्घटनाग्रस्त होने और मौत की दुआ मांगे, यह बेहद स्तरहीन राजनीति है।
उन्होंने कहा कि हुमायूं कबीर उनके लिए राजीव गांधी या इंदिरा गांधी जैसी दुखद मौत की कामना कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दुश्मन होने के बावजूद वे खुद कभी ऐसी निकृष्ट भाषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अमानवीय आचरण का असली फैसला अब रेजीनगर की जनता अपने वोटों से करेगी। हुमायूं के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा कि उन्होंने पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी के साथ विश्वासघात किया, फिर मुकुल रॉय की शरण में गए और बाद में तृणमूल में शामिल होकर धार्मिक विभाजन की राजनीति शुरू कर दी।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नवदा के विधायक के रूप में अपने पांच महीने के कार्यकाल में वे इलाके के विकास के लिए कुछ नहीं किया और आने वाले 55 महीनों में भी कुछ नहीं कर पाएंगे।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद विपक्षी खेमे के पतन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने दिलचस्प राजनीतिक आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि 34 वर्षों तक राज्य पर राज करने वाले ‘लालबाबू’ (वामपंथी) आज विधानसभा में केवल एक सीट पर सिमट गए हैं, जबकि 25 साल तक शासन करने वाली कांग्रेस अब सिर्फ एक साइनबोर्ड बनकर रह गई है और उसके पास मात्र दो विधायक हैं, जो सागरदिघी की तरह कभी भी शून्य हो सकते हैं। वहीं, 15 साल तक राज्य को तबाह करने वाली तृणमूल कांग्रेस का नाम-निशान आज ढूंढे नहीं मिल रहा है।
भवानीपुर विधानसभा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15 हजार 105 वोटों से हराने की यादें ताजा करते हुए शुभेंदु ने कहा कि जिस रात उन्हें जीत का प्रमाण पत्र मिला था, उसी समय उन्होंने तृणमूल का अंतिम समय देख लिया था। आज नई सरकार के मात्र 150 दिनों के भीतर ही तृणमूल ‘ममता एआईटीसी’ और ‘डेमोक्रेटिक टीएमसी’ (डीटीएमसी) नामक दो धड़ों में बंट चुकी है, जिनके बीच चुनाव चिह्न के लिए कानूनी लड़ाई चल रही है। उन्होंने बताया कि पुरानी तृणमूल के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों और 80 में से 64 विधायकों ने खुले तौर पर ममता बनर्जी के नेतृत्व को नकार दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नौकरी घोटाला, 100 दिन के काम के पैसे का गबन, आवास घोटाला और शक्तिपुर, शमशेरगंज व बेलडांगा में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के पापों का ही यह नतीजा है कि आज इस पार्टी का यह हश्र हुआ है।
वामपंथ, कांग्रेस और तृणमूल की लंबी विफलताओं के विपरीत मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के मात्र पांच महीने (150 दिन) के विकास और जन कल्याणकारी कार्यों का विस्तृत ब्योरा जनता के सामने रखा। स्वास्थ्य सुरक्षा के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि ‘आयुष्मान भारत’ योजना के तहत रेजीनगर विधानसभा के दो लाख एक हजार 555 नागरिकों को पांच लाख रुपये के कैशलेस इलाज के दायरे में लाया गया है, जिससे 40 हजार प्रवासी मजदूरों को देश के किसी भी हिस्से में मुफ्त उन्नत चिकित्सा मिलेगी। इसके अतिरिक्त आठ हजार 908 लोगों को ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा’ कार्ड भी सौंपे गए हैं।
आवास योजना को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 15 वर्षों के भाई-भतीजावाद को खत्म करते हुए इसी वित्तीय वर्ष में रेजीनगर के 17 हजार 51 बेघर और कच्चे घरों के मालिकों को ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत पक्के मकान देने की सूची को सरकार ने अंतिम रूप दे दिया है।
विपक्ष द्वारा भाजपा को अल्पसंख्यक विरोधी बताने वाले दुष्प्रचार का कड़ा जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘अन्नपूर्णा योजना’ के तहत रेजीनगर की 70 हजार महिलाओं को लाभ मिल रहा है, जिनमें से 35 हजार अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाएं हैं, जिनके बैंक खातों में चुनाव से पहले ही सीधे तीन हजार रुपये भेजे जा चुके हैं और दुर्गा पूजा से पहले कई अन्य परिवारों को यह लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में 48 हजार 369 बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग नागरिक बढ़ी हुई दर पर सामाजिक भत्ते और सरकारी पेंशन का लाभ उठा रहे हैं।
