रांची में छठ महापर्व संपन्न

रांची समेत पूरे झारखंड में आस्था, अनुशासन और भक्ति का संगम — प्रशासन ने की बेहतरीन व्यवस्था

ओंकार समाचार

रांची, 28 अक्टूबर । लोक आस्था का महापर्व छठ मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ पूरे झारखंड में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के माहौल में संपन्न हुआ। राजधानी हजारों व्रतियों ने जल में खड़े होकर सूर्यदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।

राजधानी रांची में हटनिया तालाब, हटिया छठ घाट, धुर्वा डैम, हेसाग तालाब, कांके डैम, हरमू नदी और धुर्वा क्षेत्र के सभी घाटों पर व्रतियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। महिलाओं ने पारंपरिक गीतों के साथ सूर्य देवता की आराधना की और 36 घंटे का निर्जला व्रत पूरा किया। “छठी मैया के जयघोष” से पूरा शहर गूंज उठा।

रांची के उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री ने अपनी धर्मपत्नी संग हटनिया तालाब घाट पर संध्याकालीन और प्रातःकालीन अर्घ्य अर्पित किया। उन्होंने समस्त जिलावासियों की सुख-शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना की और कहा “छठ महापर्व हमारी संस्कृति, अनुशासन और सामूहिक एकजुटता का प्रतीक है।”

उपायुक्त ने बताया कि सभी घाटों पर पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी, पुलिस बल, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात रहीं। महिला व्रतियों की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल, ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी निगरानी की विशेष व्यवस्था की गई थी। प्रमुख घाटों पर एंबुलेंस, मेडिकल टीम, फर्स्ट एड काउंटर और वरिष्ठ नागरिकों के लिए चिकित्सा केंद्र भी स्थापित किए गए।

संध्या और प्रातःकालीन अर्घ्य के दौरान प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, और स्वच्छता की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम ने संभाली।

ट्रैफिक पुलिस ने प्रभावी यातायात प्रबंधन सुनिश्चित किया — प्रमुख मार्गों पर वन-वे सिस्टम लागू किया गया और अस्थायी पार्किंग स्थल बनाए गए।

जिला प्रशासन ने बताया कि पूरे जिले में छठ पर्व शांति और सौहार्द के माहौल में संपन्न हुआ। कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। उपायुक्त ने केंद्रीय शांति समिति, मीडिया, स्वयंसेवी संगठनों और नागरिकों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा “सभी के सहयोग से छठ महापर्व न केवल भव्य और भक्तिमय रहा, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित और सुव्यवस्थित भी रहा।”

हटिया और आसपास के क्षेत्रों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

हटिया छठ घाट, हेसाग तालाब, पटेल नगर, तिरुपति अपार्टमेंट और नेपाली कॉलोनी सहित रांची के अन्य क्षेत्रों में भी छठ पूजा अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई। व्रतियों ने भगवान भास्कर से परिवार की समृद्धि और संतान की दीर्घायु की प्रार्थना की।

व्रती रश्मि कुमारी ने कहा “मैं पिछले पांच वर्षों से छठ कर रही हूं, आत्मसंयम और निष्ठा से यह पर्व मेरे लिए आस्था का केंद्र है।” वहीं शकुंतला सिंह ने इसे “स्त्री शक्ति और पर्यावरण संरक्षण का पर्व” बताया, जबकि बुद्धेश्वर बड़ाईक ने कहा कि “छठ सामाजिक एकता और अनुशासन का संदेश देता है।”

लोहरदगा : श्रद्धा और भक्ति का महासंगम

लोहरदगा जिले के ठकुराइन तालाब, बड़ा तालाब, शंख नदी, कोयल नदी और हरमू घाट पर छठव्रतियों की भारी भीड़ रही। सुरक्षा के विशेष इंतजामों के बीच श्रद्धालुओं ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया।रंगीन रोशनी, भक्ति गीतों और लोक संगीत से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

जिला प्रशासन ने घाटों की सफाई, प्रकाश और निःशुल्क पूजन सामग्री वितरण की व्यवस्था की थी।

हजारीबाग

सूर्योपासना के महापर्व छठ का मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही विधिवत समापन हो गया। जिले के विभिन्न घाटों कनहरी हिल तालाब, झरना घाट, बड़कागांव तालाब, कटकमसांडी, बड़कागांव और चरही सहित ग्रामीण इलाकों में व्रतधारियों की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में छठी मैया से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना की। अर्घ्य के समय घाटों पर छठी मइया के गीतों की गूंज और दीपों की ज्योति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। जिले में प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। नगर निगम, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम देर रात तक मुस्तैद रही। प्रशासनिक तैयारी रही चाक चौबंद उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जिले के सभी प्रमुख घाटों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस और राहत दल को भी चौकसी पर रखा गया।

नगर निगम कर्मियों की ओर से घाटों की सफाई और प्रकाश व्यवस्था पहले से ही दुरुस्त की गई थी।

भक्ति और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगमछठ पर्व ने हजारीबाग की सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया। स्थानीय कलाकारों ने घाटों पर पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुति दी, वहीं तुरी समुदाय की ओर से बनाए गए बांस -सूप और टोकरी की खूब बिक्री हुई। बाजारों में रौनक लौट आई और लोगों में अपार उत्साह देखा गया।

उल्लेखनीय है कि इस बीच छठ पर्व के दौरान जिले में कुछ दुखद घटनाएं भी सामने आईं। केरेडारी थाना क्षेत्र के बेंगवरी गांव में अर्घ्य देते समय 29 वर्षीय छठव्रती मम्पी कुमारी की मौत हो गई। वहीं, बड़कागांव प्रखंड के बेला गांव में दो बच्चियों की तालाब में डूबने से मृत्यु हो गई।

खूंटी में गंगा आरती से गूंजा वातावरण

खूंटी, तोरपा और मुरहू के घाटों पर मंगलवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में सजे घाटों पर पहुंचे और सूर्यदेव को अर्घ्य दिया।

इस बार खूंटी जिले में बनारस से आए पंडितों की टीम ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गंगा आरती कराई। दीपों की कतारें और शंखध्वनि से पूरा माहौल आध्यात्मिक बना रहा।  श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर आरती में भाग लिया और भगवान सूर्य से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की।

खूंटी, तोरपा, मुरहू, रनिया और अड़की सहित सभी क्षेत्रों में यह पर्व अत्यंत श्रद्धा और सौहार्द के साथ संपन्न हुआ।

 गिरिडीह में व्रतियों ने किया कठिन तप का समापन

गिरिडीह जिले में मंगलवार की सुबह हजारों व्रती और श्रद्धालु घाटों पर उमड़े। व्रतियों ने 36 घंटे के निर्जला उपवास के बाद उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण किया। उन्होंने अपने परिवार की शांति, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की। छठ पूजा उपरांत श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पर्व का समापन किया।

स्थानीय छठ घाटों पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर ओर “छठी मइया के जयघोष” से वातावरण गूंज उठा। नगर निगम और प्रशासन द्वारा घाटों पर सुरक्षा, प्रकाश और सफाई की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी।

रामगढ़ में सख्त सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं ने जताई संतुष्टि

रामगढ़ जिले में भी मंगलवार को चार दिवसीय छठ महापर्व उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हुआ। व्रतियों ने 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की। घाटों पर हजारों की भीड़ सुबह से ही जमा रही।

भुरकुंडा थाना प्रभारी निर्भय गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस बल ने विधि-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

नलकारी नदी घाट और भुरकुंडा बाजार क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इस बार प्रशासनिक सतर्कता और सामाजिक सहयोग से छठ पूजा अत्यंत शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से सम्पन्न हुई।

बोकारो में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

बोकारो में भी मंगलवार की सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब घाटों पर उमड़ पड़ा।उदयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करते हुए व्रतियों ने चार दिवसीय पर्व का समापन किया। जल में खड़े होकर उन्होंने सूर्यदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की। नगर निगम और जिला प्रशासन ने घाटों पर साफ-सफाई, रोशनी और पेयजल की उचित व्यवस्था की थी। छठ गीतों की मधुर ध्वनि और श्रद्धालुओं की भीड़ से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

आस्था, अनुशासन और एकता का प्रतीक बना छठ पर्व

चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व ने पूरे झारखंड में भक्ति, आस्था और सामाजिक एकता का संदेश दिया।

लोगों ने कहा कि छठ न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और आत्मसंयम का जीवंत उदाहरण है। पूरे राज्य में छठ की रौनक और सूर्योपासना का उत्सव देखने लायक रहा।