शव बरामद

खूंटी , 4मई । झारखंड के विभिन्न जिलों में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा घटनाओं में खूंटी और पूर्वी सिंहभूम में हाथियों के हमले से दो लोगों की मौत हो गई, जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है।

खूंटी के जंगल में ग्रामीण को पटक-पटक कर मार डाला
खूंटी जिले के रनिया थाना क्षेत्र अंतर्गत गढ़सीदम के रायमुंडा जंगल में जंगली हाथी के हमले में एक ग्रामीण की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान पश्चिमी सिंहभूम के बंदगांव थाना क्षेत्र निवासी करीब 65 वर्षीय सामुएल पूर्ति के रूप में की गई है।
बताया जाता है कि सामुएल पूर्ति दो मई को घर से बाजार जाने के लिए निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों द्वारा खोजबीन के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला। सोमवार को जंगल में मवेशी चरा रहे चरवाहों ने उनका शव देखा और पुलिस व वन विभाग को सूचना दी।
मौके पर पहुंची टीम ने शव की पहचान की। आशंका है कि हाथी ने उन्हें पटक-पटक कर मार डाला। शव दो दिनों तक जंगल में पड़ा रहा। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वन विभाग की ओर से तत्काल 15 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है।

पूर्वी सिंहभूम में वृद्धा की मौत, ग्रामीणों में आक्रोश
पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड के चौठिया गांव स्थित बांधडीह टोला में जंगली हाथी के हमले में 72 वर्षीय दुलारी मुर्मू की मौके पर ही मौत हो गई। बताया गया कि वह सुबह अपने घर से निकली थीं, तभी रास्ते में हाथी ने उन पर हमला कर दिया।
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और परिजनों को तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की। हालांकि, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हाथियों की मौजूदगी की पूर्व सूचना नहीं दी गई, जिससे यह घटना हुई। गांव के आसपास दो हाथियों के डेरा डालने की बात कही जा रही है, जिससे लोगों में दहशत है।

पीड़ित परिवारों को मदद, जनप्रतिनिधियों की पहल
इसी बीच खूंटी जिले के जरियागढ़ क्षेत्र में पहले हुई एक घटना में मृतक जेवियर होरो के परिजनों से जनप्रतिनिधियों ने मुलाकात कर सहायता राशि और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई। साथ ही परिवार को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने की पहल भी की गई।

लगातार बढ़ रहे हमले, ग्रामीणों की सुरक्षा पर सवाल
लगातार हो रही इन घटनाओं ने ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि वन विभाग की ओर से समय पर चेतावनी और निगरानी नहीं होने के कारण ऐसे हादसे बढ़ रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर सुरक्षित स्थानों पर खदेड़ा जाए और प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।