कोलकाता, 10 जून । कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में जनवरी, 2026 में हुई हिंसा और दंगा जैसी घटनाओं की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार से उसका स्पष्ट रुख बताने को कहा है। अदालत ने जानना चाहा है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार इस मामले में एनआईए जांच का विरोध जारी रखेगी या एजेंसी को जांच आगे बढ़ाने की अनुमति देगी।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने की। अदालत ने मंगलवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अगले सप्ताह तक इस संबंध में अपना स्पष्ट मत पेश करे।
गौरतलब है कि, बेलडांगा हिंसा की जांच एनआईए द्वारा शुरू किए जाने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय
का दरवाजा खटखटाया था। अब राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार बनने और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पद संभालने के बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि नई सरकार उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी चुनौती को जारी रखेगी या एनआईए जांच को आगे बढ़ने देगी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार सिद्धांततः एनआईए जांच जारी रहने के खिलाफ नहीं है। हालांकि, सरकार को यह तय करने के लिए कुछ और समय चाहिए कि इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए), 1967 की धाराएं लागू होती हैं या नहीं।
इसके बाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को अगले सप्ताह तक अपना अंतिम रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया।
उल्लेखनीय है कि, जनवरी 2026 में पड़ोसी राज्य झारखंड में एक प्रवासी श्रमिक की मौत के बाद बेलडांगा में तनाव फैल गया था। श्रमिक का शव बेलडांगा पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि उसकी धार्मिक और भाषाई पहचान के कारण पीट-पीटकर हत्या की गई है। इसके विरोध में रेलवे और सड़कों को अवरुद्ध कर प्रदर्शन शुरू हुआ था।
स्थिति तब बिगड़ गई जब पुलिस ने अवरोध हटाने का प्रयास किया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला कर दिया और कई पत्रकार भी हिंसा का शिकार हुए, जिनमें कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
बाद में झारखंड पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि संबंधित प्रवासी श्रमिक की मौत आत्महत्या का मामला था, न कि हत्या का। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जांच अपने हाथ में ली थी।
अब उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद राज्य सरकार के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे यह तय होगा कि बेलडांगा हिंसा मामले में एनआईए की जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी।—————
