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कोलकाता, 21 अगस्त । जनगणना के काम में लगाए जाने वाले शिक्षकों को एक साथ स्कूल में पढ़ाने और जनगणना की ड्यूटी करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि जिस शिक्षक को जनगणना के काम में लगाया जाएगा, उसे प्रशासनिक तौर पर ‘ऑन ड्यूटी’ माना जाएगा। साथ ही, स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित स्कूल प्रबंधन को वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था करनी होगी।

न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने जनगणना में शिक्षकों की तैनाती से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यदि किसी शिक्षक को जनगणना की जिम्मेदारी दी जाती है तो राज्य को इसकी जानकारी संबंधित स्कूल प्रबंधन को देनी होगी। इसके बाद स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि उस शिक्षक की अनुपस्थिति में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

मामले की सुनवाई के दौरान शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता फिरदौस शमीम ने अदालत को बताया कि कई शिक्षक दिन में स्कूल में पढ़ाने के बाद शाम चार बजे के बाद जनगणना के काम में लगाए जा रहे हैं। एक साथ दो जिम्मेदारियां निभाने के कारण शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षक एक समय में एक ही काम करेंगे। जो शिक्षक जनगणना के काम में लगाए जाएंगे, उनसे उस दौरान स्कूल में कक्षाएं नहीं कराई जा सकतीं। संबंधित स्कूल को पहले से यह जानकारी देनी होगी कि किन शिक्षकों को जनगणना की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बाद पढ़ाई जारी रखने के लिए वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था करना संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी।

शिक्षकों की ओर से अदालत में कहा गया कि वे जनगणना की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इस अवधि को आधिकारिक तौर पर ‘ऑन ड्यूटी’ माना जाना चाहिए। साथ ही, बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक साथ जनगणना के काम में लगाने से स्कूलों की नियमित पढ़ाई बाधित होने की आशंका भी जताई गई।

इससे पहले अदालत ने बड़ी संख्या में स्कूल शिक्षकों को एक साथ जनगणना के काम में लगाए जाने पर सवाल उठाया था। न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने कहा था कि राज्य एक साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों को तैनात करने के बजाय कुछ शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से इस काम में लगा सकता था, ताकि स्कूलों में पढ़ाई का काम प्रभावित न हो।

अदालत ने दूर-दराज से स्कूल आने वाले शिक्षकों की व्यावहारिक परेशानियों पर भी सवाल उठाया था। न्यायमूर्ति राव ने पूछा था कि शिक्षक आखिर कब स्कूल में पढ़ाएंगे और कब जनगणना का काम करेंगे।

समस्या के समाधान के लिए अदालत ने रोटेशन के आधार पर चार-पांच शिक्षकों को जनगणना के काम में लगाने का सुझाव भी दिया था। जरूरत पड़ने पर एक दिन के अंतराल पर शिक्षकों से यह काम कराने की संभावना पर भी विचार करने को कहा गया था।

जनगणना के लिए शिक्षकों की तैनाती को लेकर ने यह सवाल भी उठाया था कि क्या केंद्र ने शिक्षकों को इस काम में लगाने का फैसला करने से पहले राज्य सरकार से चर्चा की थी और स्कूल शिक्षकों को ही इस जिम्मेदारी में लगाने की जरूरत क्यों पड़ी।

बुधवार को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। उस दिन न्यायमूर्ति राव ने मौखिक टिप्पणी में कहा था कि शिक्षकों का मुख्य काम पढ़ाना है। उन्हें या तो जनगणना के काम में लगाया जाए या फिर स्कूल में पढ़ाने दिया जाए। शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने इसी आधार पर स्पष्ट किया कि शिक्षक एक साथ दोनों जिम्मेदारियां नहीं निभाएंगे। जनगणना की ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को ‘ऑन ड्यूटी’ माना जाएगा और स्कूलों में पढ़ाई सुचारु रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी।