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कोलकाता, 21 अगस्त। कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को दक्षिण 24 परगना जिले के अलग-अलग थानों में दर्ज तीन एफआईआर के मामलों में अंतरिम संरक्षण दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि 11 सितंबर तक इन मामलों में उनके खिलाफ कोई कठोर पुलिस कार्रवाई नहीं की जाए।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने यह आदेश दिया। बनर्जी ने जुलाई में बिष्णुपुर थाने में दर्ज दो और रवींद्रनगर थाने में दर्ज एक एफआईआर को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था।

अदालत ने कहा कि अंतरिम संरक्षण का आदेश पुलिस को मामलों की जांच करने से नहीं रोकेगा। पुलिस अपनी जांच जारी रख सकती है, लेकिन इस दौरान अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि बनर्जी के खिलाफ दर्ज तीन अन्य आपराधिक मामलों को लेकर एक अलग याचिका लंबित है। उस मामले में अदालत 25 अगस्त को आदेश सुनाने वाली है। इसे देखते हुए मौजूदा याचिका पर अगली सुनवाई सात सितंबर को तय की गई है।

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अभिषेक बनर्जी को संरक्षण देने का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि बनर्जी प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उनके प्रभाव के कारण शिकायतकर्ताओं के लिए पहले पुलिस में मामले दर्ज कराना संभव नहीं था।

अदालत ने कहा कि वह पिछले कुछ समय से अभिषेक बनर्जी की ओर से अलग-अलग थानों में दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इससे पहले भी अदालत बनर्जी के खिलाफ दर्ज तीन अन्य एफआईआर और विधाननगर पुलिस की साइबर अपराध शाखा में दर्ज एक मामले में उन्हें संरक्षण दे चुकी है।

अदालत को पहले बताया गया था कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में कुल 16 एफआईआर दर्ज हैं। अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं।