पूर्वी सिंहभूम, 30 अगस्त । जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली ज्ञान परंपरा है। संस्कृत की सूक्तियों में जीवन के अनुभव और व्यवहार का गहरा संदेश छिपा है। नई पीढ़ी यदि इन सूक्तियों को पढ़कर उनके अर्थ को समझे और उन्हें अपने आचरण में उतारे तो उसका भविष्य बेहतर बन सकता है।
रविवार को पीपुल्स एकेडमी के कालिदास सभागार में पाणिनि प्रज्ञा परिषद के तत्वावधान में आयोजित समारोह में आचार्य बालमुकुंद चौधरी की पुस्तक ‘सुभाषित संग्रहावली’ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर सरयू राय ने कहा कि पुस्तक में करीब 37 ग्रंथों से चयनित संस्कृत सूक्तियों का संकलन किया गया है। इसकी विशेषता यह है कि सूक्तियों का हिंदी और अंग्रेजी में भी अनुवाद किया गया है, जिससे पाठकों के लिए उनके भाव और संदेश को समझना आसान होगा।
विधायक सरयू राय ने ‘सुभाषित संग्रहावली’ को ज्ञान की महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए कहा कि पुस्तक का अध्ययन केवल जानकारी हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें निहित विचारों को जीवन में उतारने का प्रयास भी होना चाहिए। उन्होंने युवाओं और नई पीढ़ी से संस्कृत साहित्य से जुड़ने का आह्वान किया।
सरयू राय ने कहा कि संस्कृत भारती के आग्रह पर श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में निर्माणाधीन भवन में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
समारोह की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. रागिनी भूषण ने कहा कि संस्कृत की सूक्तियां समाज के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत को कठिन भाषा मानने की धारणा सही नहीं है। रोजमर्रा की बोलचाल में हम अनेक संस्कृत शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन संस्कृत से दूरी के कारण यह समझ नहीं पाते कि हमारी भाषा में प्रचलित कई शब्द इसी प्राचीन भाषा से आए हैं।
पुस्तक के रचयिता आचार्य बालमुकुंद चौधरी ने अतिथियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने सभी अतिथियों को अपने हाथों से विशिष्ट प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
समारोह में पाणिनि प्रज्ञा परिषद की ओर से पूर्व में आयोजित संस्कृत श्लोक और संभाषण प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षक, विद्यार्थी और शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग मौजूद रहे।
