“The Samarpan Samman stands as a tribute to the unsung architects of society…”
इस भाव-वाक्य को यदि एक शब्द में बाँधा जाए, तो वह है समर्पण—वह समर्पण, जो व्यक्ति को साधारण से असाधारण और कर्म को क्षणिक से शाश्वत बना देता है।
समर्पण ट्रस्ट की ओर से आयोजित किया जाने वाला समर्पण सम्मान समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की चेतना, स्मृतियों और मूल्यों को जीवंत बनाए रखने का एक भावपूर्ण अनुष्ठान है। यह समारोह उन मौन साधकों को रद्धांजलि है, जिन्होंने बिना यश-लालसा के अपने जीवन का श्रेष्ठ अंश समाज को अर्पित कर दिया—और स्वयं समय की धारा में पीछे छूट गए।
इस पावन विचार का बीज उस संवेदनशील क्षण में अंकुरित हुआ, जब ट्रस्ट के सभापति, प्रख्यात समाजसेवी एवं पूर्व विधायक दिनेश बजाज ने यह अनुभव किया कि समाज की प्रगति जिन कंधों पर टिकी है, वही कंधे अक्सर विस्मृति के अंधकार में ओझल हो जाते हैं। वे महापुरुष, जिन्होंने अपने पुरुषार्थ, साधना और निस्वार्थ समर्पण से समाज को दिशा दी—यदि उन्हें याद न किया जाय, तो यह हमारी सामूहिक चेतना की विफलता होगी।

श्री बजाज के शब्दों में—
“ये वही विभूतियाँ हैं, जिनके बिना समाज, उद्योग, व्यापार और सेवा की यात्रा अधूरी है। उनके कर्म ही हमारी सामाजिक धरोहर हैं। उनका स्मरण ही इस समारोह की मूल प्रेरणा है।
कोलकाता की पुण्यभूमि सदा से ऐसी महान आत्माओं की कर्मस्थली रही है, जिनकी सोच और संकल्प की गूँज नगर-सीमाओं से आगे बढ़कर राष्ट्रव्यापी चेतना बनी। आने वाली पीढ़ियाँ इन महापुरुषों के योगदान से परिचित हों—इसी दूरदर्शी उद्देश्य के साथ समर्पण ट्रस्ट ने दिवंगत महान विभूतियों के नाम पर सम्मानों की स्थापना का ऐतिहासिक निर्णय लिया। यह निर्णय केवल अतीत का स्मरण नहीं, भविष्य का मार्गदर्शन भी है।
इन सम्मानों के माध्यम से ट्रस्ट उन जीवनगाथाओं को समाज के सम्मुख लाता है, जिन्होंने परिवर्तन का बीज बोया, मूल्यों की फसल उगाई और सेवा को साधना बनाया। यह पहल समाज को यह गूढ़ संदेश देती है कि जो लोग अपने जीवन को समाज के लिए अर्पित कर देते हैं, उन्हें भूल जाना आत्मविस्मृति के समान है।
इसी भावभूमि पर समाजसेवा, उद्योग और लोककल्याण के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों की स्मृति में पाँच प्रतिष्ठित सम्मानों की स्थापना की गई। ये सम्मान केवल प्रशस्ति-पत्र नहीं, बल्कि कृतज्ञता के वे दीप हैं, जो समाज को सकारात्मक परिवर्तन, नैतिक दृढ़ता और प्रेरक मूल्यों की ओर आलोकित करते हैं। प्रेरणा की यह ज्योति निरंतर प्रज्वलित रहे—इसी उद्देश्य से समर्पण ट्रस्ट वर्ष में दो बार इस समारोह का आयोजन करता है।
ट्रस्ट के महासचिव प्रदीप ढेडिया के अनुसार, “समाज से जो पाया है, उसे समाज को लौटाना ही सच्ची सामाजिक जिम्मेदारी है। इसी पुनीत संकल्प के साथ आगामी 20 मार्च, 2026 को महानगर के एक पंचसितारा होटल में पुनः समर्पण सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह एक प्रकार का सारस्वत यज्ञ है, जो अनवरत प्रवाहित रहेगा—क्योंकि सेवा और स्मरण की साधना कभी पूर्ण नहीं होती।
समर्पण ट्रस्ट का ध्येय शिक्षा, साहित्य, स्वास्थ्य, संस्कृति, भाषा, उद्योग-व्यापार और समाजोत्थान के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी का निर्वहन करना है। ट्रस्ट का सतत प्रयास है कि समाज की जड़ों को सींचने वाली महान विभूतियों के कार्यों को प्रकाश में लाया जाए, ताकि उनकी जीवनयात्राएँ नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा-पुंज बन सकें।
यह सम्मान समारोह उद्घोष करता है कि समाज के सच्चे नायक वही हैं, जो निस्वार्थ भाव से कर्म करते हैं—चाहे उनका क्षेत्र कोई भी हो। मेहनत, निष्ठा, ईमानदारी और उद्देश्य के प्रति समर्पण ही वह अमृत है, जो मनुष्य को उसके कर्मों द्वारा अमर बनाता है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष शंकरलाल अग्रवाल बताते हैं कि जनसेवा के माध्यम से समाज के सर्वांगीण विकास हेतु ट्रस्ट पूर्णतः प्रतिबद्ध है। रोटी, कपड़ा और मकान के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य सेवाएँ मानव की बुनियादी आवश्यकता हैं। आमजन तक स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाना ट्रस्ट की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है।
उनके शब्दों में— “डॉक्टर धरती पर ईश्वर के प्रतिरूप हैं।
इसी भावना के प्रतिफलस्वरूप ट्रस्ट प्रतिवर्ष ख्यातिलब्ध चिकित्सकों को सम्मानित करता है तथा आगामी जुलाई माह में डॉक्टर्स डे के अवसर पर इस क्रम में भव्य आयोजन किया जायेगा।
वहीं ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट एन. के. अग्रवाल का मानना है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट देश की अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ स्तंभ हैं। वे न केवल आर्थिक नब्ज को समझते हैं, बल्कि व्यवसायियों और उद्यमियों को सशक्त बनाकर राष्ट्र-निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी भाव से समर्पण ट्रस्ट नवोदित सीए को सम्मानित कर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री सीए सुरेश प्रभु की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित सीए गौरव सम्मान समारोह में 200 नवोदित सीए का सम्मान—इस संकल्प की सशक्त अभिव्यक्ति है, और यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।
अंततः, समर्पण सम्मान समारोह केवल एक आयोजन नहीं—यह समाज के चरित्र निर्माण की एक सशक्त यात्रा है।
यह यात्रा अतीत की स्मृतियों से प्रेरणा लेकर, वर्तमान को संस्कारित करती हुई, भविष्य को उज्ज्वल दिशा प्रदान करती है—जहाँ हर कर्म में समर्पण हो और हर उपलब्धि में समाज का कल्याण।
