पूर्व मुख्यमंत्री ने शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौपा ज्ञापन
रांची , 9 सितंबर। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पठन सामग्री का प्रकाशन संताली भाषा की लिपि “ओलचिकी लिपि” में कराने की मांग की है। रघुवर दास ने बुधवार को नई दिल्ली में देश के शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर उन्हें इस आशय का ज्ञापन सौंपा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को बताया कि भारत के शिक्षा मंत्रालय की ओर से विभिन्न पाठ्य पुस्तकों एवं शैक्षणिक सामग्रियों के निर्माण एवं प्रकाशन का कार्य किया जा रहा है। इसमें संताली भाषा की पुस्तकों को देवनागरी लिपि में तैयार एवं प्रकाशित करने पर विचार किया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को बताया कि वर्ष 2025 में पूरे देश में ओलचिकी लिपि का शताब्दी वर्ष गौरव और उत्साह के साथ मनाया गया। भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित शताब्दी समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने ओलचिकी लिपि संताली में अनुदित भारत के संविधान का लोकार्पण किया गया।
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हूल दिवस (30 जून) पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर देश के नाम संदेश ओलचिकी लिपि में दिया। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की सरकार ने संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित किया था, जिसकी अपनी स्वतंत्र वैज्ञानिक एवं सर्वमान्य लिपि ओलचिकी लिपि है।
ज्ञापन में बताया गया है कि ओलचिकी लिपि झारखंड, बंगाल, ओड़िशा, छत्तीसगढ़, असम समेत कई राज्यों के साथ-साथ नेपाल और बांग्लादेश में भी व्यापक रूप से प्रचलित है।
ज्ञापन में अनुरोध किया गया है कि एनसीईआरटी तथा शिक्षा मंत्रालय से संबंधित सभी संस्थाओं को संताली भाषा की सभी पाठ्य पुस्तकों, संदर्भ सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शिकाओं एवं डिजिटल संसाधनों को अनिवार्य रूप से केवल और केवल उसकी मूल एवं स्वीकृत ओलचिकी लिपि में ही तैयार एवं प्रकाशित करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि देश के करोड़ों संताली भाषियों की समृद्ध और भाषाई पहचान को संबल प्राप्त हो।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि शिक्षा मंत्री जी से इस संबंध में बातचीत बहुत सकारात्मक रही।
