पश्चिमी सिंहभूम के तांबो चौक में तनाव, कई घायल; दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने की न्यायिक जांच की मांग
पश्चिमी सिंहभूम , 28 अक्टूबर। पश्चिमी सिंहभूम जिले के तांबो चौक में सोमवार देर रात उस समय स्थिति बेकाबू हो गई जब नो-एंट्री आंदोलन को लेकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और पुलिस के बीच भिड़ंत हो गई। दिन के समय भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। जब पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की तो स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई और ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को तितर-बितर किया।
इस दौरान कई पुलिसकर्मी और ग्रामीण घायल हो गए। भीड़ ने सदर एसडीपीओ बाहमन टूटी की स्कॉर्पियो गाड़ी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के बाद देर रात तक तांबो चौक और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने बताया कि अब स्थिति नियंत्रण में है और यातायात बहाल कर दिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि एनएच-220 और चाईबासा बाईपास मार्ग पर दिन के समय भारी वाहनों की आवाजाही से लगातार हादसे हो रहे हैं।
उनका दावा है कि पिछले एक वर्ष में 150 से अधिक लोग ट्रक की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं।
सोमवार को ग्रामीण परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा के आवास घेराव के लिए निकले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें तांबो चौक पर रोक दिया। इसके बाद वे वहीं धरने पर बैठ गए, चूल्हा जलाकर खाना बनाया, गीत-संगीत किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
शाम होते-होते उन्होंने मुख्य सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे यातायात ठप हो गया। रात में पुलिस ने जब जाम हटाने का प्रयास किया, तो झड़प और लाठीचार्ज की स्थिति बन गई।
लाठीचार्ज पर सियासत गरमाई, दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने की न्यायिक जांच की मांग

घटना के अगले दिन मंगलवार को राज्य की राजनीति में इस मुद्दे पर तूफान खड़ा हो गया।पूर्व मुख्य मंत्री मधुकोड़ा, चंपाई सोरेन और पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और इसे आदिवासी विरोधी बताया। मधुकोड़ा और गीता कोड़ा ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि “शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे ग्रामीणों पर पुलिस का बर्बर लाठीचार्ज लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है। निर्दोष आदिवासियों पर लाठियां चलवाकर सरकार ने अपनी संवेदनहीनता साबित की है।” उन्होंने न्यायिक जांच कराने, घायलों को मुआवजा देने और गिरफ्तार ग्रामीणों की तत्काल रिहाई की मांग की।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “जो सरकार खुद को आदिवासियों की सरकार बताती है, वही आज आदिवासियों पर अत्याचार कर रही है। पहले भोगनाडीह, फिर रांची सरना स्थल, उसके बाद नगड़ी, और अब चाईबासा — हर जगह आदिवासियों पर लाठीचार्ज हो रहा है।” उन्होंने मंत्री दीपक बिरुवा पर भी आरोप लगाया कि उनके निर्देश पर शांतिपूर्ण भीड़ पर बल प्रयोग किया गया।
भारत आदिवासी पार्टी ने भी की कड़ी निंदा, उच्चस्तरीय जांच की मांग
भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह घटना “लोकतंत्र पर हमला” है और इस मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मांग पूरी तरह जायज है क्योंकि यह जनजीवन और सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने पुलिस पर षड्यंत्रपूर्वक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि “कोल्हान क्षेत्र से गठबंधन सरकार को सबसे अधिक जनप्रतिनिधि मिले, फिर भी यहां की जनता पर पुलिसिया दमन हो रहा है। यह कोल्हान के माथे पर काला धब्बा है।”
प्रशासन का पक्ष
ड्यूटी पर मौजूद सदर सीओ ने बताया कि जब प्रदर्शनकारियों ने अचानक पथराव शुरू किया, तो पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता शांति और जनसुरक्षा बनाए रखना है। फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
स्थिति नियंत्रण में, आंदोलन जारी रहेगा
घटना के बाद मंगलवार को तांबो चौक और आसपास के इलाकों में तनाव बना हुआ है। ग्रामीण नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक दिन के समय भारी वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी नहीं लगाई जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
