नक्सली कमांडर

सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता 

 मुखदेव पर थे 24 से अधिक मामले 

लंबे समय से था सुरक्षा बलों के निशाने पर

पलामू, 14 सितंबर। झारखंड के पलामू जिले में पुलिस और उग्रवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में प्रतिबंधित संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) का कुख्यात कमांडर मुखदेव यादव मारा गया। मुखदेव पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसके खिलाफ 24 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे।

रविवार सुबह मनातू और तरहसी थाना क्षेत्र के सीमावर्ती काश और बंशी खुर्द जंगल में टीएसपीसी उग्रवादियों और सुरक्षाबलों के बीच भीषण गोलीबारी हुई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने मुखदेव यादव को ढेर कर दिया। मौके से उसका शव और एक इंसास राइफल बरामद हुई।

पलामू एसपी रीष्मा रमेशन ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी जारी है। यह वही दस्ता था, जिसने 3 सितंबर की रात मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव में पुलिस पार्टी पर हमला किया था। उस मुठभेड़ में जिला पुलिस के दो जवान संतन मेहता और सुनील राम शहीद हुए थे, जबकि एक जवान घायल हुआ था। पुलिस को विश्वास है कि इस कार्रवाई से जवानों की शहादत का बदला लिया गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार मुखदेव यादव मूल रूप से मनातू के मिटार गांव का रहने वाला था। पहले वह भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़ा था और बाद में टीएसपीसी में शामिल हो गया। वह नक्सली कमांडर शशिकांत का बेहद करीबी था और लेवी वसूली तथा हथियारों की डीलिंग का काम करता था।

मुखदेव कई बड़े नक्सली हमलों में शामिल रहा है। उस पर पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार में पुलिस और ग्रामीणों पर हमले के आरोप हैं। बताया जाता है कि अब तक हुई छह से अधिक मुठभेड़ों में वह शामिल रहा, जिनमें चार जवान शहीद हुए और एक हमले में आदिवासी परिवार के पिता-पुत्र की भी मौत हुई थी।

फिलहाल पुलिस ने शशिकांत दस्ते को खत्म करने के लिए कोबरा, जगुआर और पलामू पुलिस की संयुक्त टीम को लगाया है। करीब 200 से अधिक जवान इलाके में अभियान चला रहे हैं।