रांची, 25 सितंबर। झारखंड उच्च न्यायालय ने शैक्षणिक प्रमाण पत्र सही नहीं होने के आधार पर पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को नौकरी से हटाने के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने प्रार्थियों को अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है।
मामले में मेरी मुर्मू एवं अन्य की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखा था। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार ने पक्ष रखा।
दरअसल, इलाहाबाद और देवघर के कुछ गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों से मैट्रिक और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले पारा शिक्षकों की शैक्षणिक अर्हता को लेकर मामला सामने आया था। इनमें इंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद, हिंदी महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद और हिंदी विद्यापीठ, देवघर आदि संस्थानों के प्रमाण पत्र शामिल थे।
इन प्रमाण पत्रों के आधार पर कार्यरत कक्षा पहली से पांचवीं और कक्षा छठी से आठवीं के पारा शिक्षकों की शैक्षणिक अर्हता को सही नहीं बताते हुए उनके कार्य पर रोक लगाने और मानदेय बंद करने के संबंध में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सात नवंबर 2025 को पत्र जारी किया था।
इस पत्र के आलोक में राज्य के विभिन्न जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों ने ब्लॉक विस्तार अधिकारी, नगर संसाधन केंद्र और संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया था।
पूर्वी सिंहभूम के जिला शिक्षा अधीक्षक ने भी संबंधित पारा शिक्षकों को कार्य से हटाने और उनका मानदेय रोकने का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ मेरी मुर्मू एवं अन्य ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।———–
