रांची में महिला मोर्चा का प्रदर्शन

हजारीबाग/रांची, 30 मार्च। झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड स्थित कुसुंबा गांव में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और निर्मम हत्या की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस जघन्य अपराध के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के आह्वान पर सोमवार को बुलाए गए बंद का व्यापक असर देखने को मिला। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बाजार बंद रहे, सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया।

विष्णुगढ़ क्षेत्र में बंद का असर इतना व्यापक रहा कि पूरा इलाका मानो ठहर सा गया। दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और सड़कें लगभग खाली नजर आईं। सात माइल मोड़, हॉस्पिटल मोड़ और अखाड़ा चौक जैसे प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग करते दिखे। झुमरा क्षेत्र में भी बंद का असर साफ दिखाई दिया, जहां बाजार पूरी तरह बंद रहे और लोगों ने एकजुट होकर न्याय की मांग की।

घटना को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है, क्योंकि वारदात के कई दिन बीत जाने के बावजूद आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इसी बीच मामले में न्यायालय ने भी संज्ञान लेते हुए राज्य के अधिकारियों से जवाब मांगा है और पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने का निर्देश दिया है।

इस मुद्दे पर मनीष जायसवाल ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन पूरे झारखंड स्तर तक फैलाया जा सकता है। वहीं पार्टी की अन्य नेताओं ने भी राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

घटना के विरोध की लहर केवल हजारीबाग तक सीमित नहीं रही, बल्कि राजधानी रांची सहित कई जिलों में प्रदर्शन तेज हो गया। भाजपा महिला मोर्चा के नेतृत्व में रांची में उपायुक्त कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने ‘दोषियों को फांसी दो’ और ‘बेटी को न्याय दो’ जैसे नारों के साथ राज्य सरकार के खिलाफ रोष जताया और पीड़िता के लिए न्याय की मांग की।

इसी तरह कोडरमा, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में भी भाजपा और महिला मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, मृत्युदंड की सजा, पीड़ित परिवार को सुरक्षा और आर्थिक सहायता की मांग की। कई स्थानों पर वक्ताओं ने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताते हुए इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया।

ज्ञात हो कि बच्ची 24 मार्च की रात से लापता थी और अगले दिन उसका शव खेत में क्षत-विक्षत अवस्था में मिला था। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि पूरे राज्य में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग लगातार सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग कर रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलती, आंदोलन जारी रहेगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड में कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासनिक तत्परता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। फिलहाल पूरे राज्य में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।