झारखंड हाईकोर्ट

रांची, 09 जून । झारखंड उच्च न्यायालय ने मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) नियुक्ति मामले में नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए जाने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने आदेश दिया कि 12 जून तक सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं, अन्यथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना मामले में आरोप गठित किए जाएंगे।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत के पूर्व आदेश के अनुपालन में राज्य परिवहन आयुक्त व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति का मामला अभी मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की स्वीकृति के लिए लंबित है, इसलिए निर्णय लेने के लिए कुछ और समय की आवश्यकता है।

हालांकि, अदालत ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दो वर्ष पहले ही दिया जा चुका है, लेकिन अब तक उसका पालन नहीं किया गया। अदालत ने सरकार द्वारा समय मांगने के आग्रह को खारिज करते हुए कहा कि आदेशों के अनुपालन में लगातार हो रही देरी को अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 12 जून तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए तो अवमानना मामले में प्रतिवादियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 12 जून को निर्धारित की गई है।

उल्लेखनीय है कि अदालत के आदेश का पालन नहीं होने पर राज्य परिवहन आयुक्त तथा परिवहन विभाग के संबंधित अधिकारी (प्रतिवादी संख्या-2) को तलब किया गया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिए जाने के बावजूद सरकार ने अब तक उसका अनुपालन नहीं किया, जिसके कारण उन्हें अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।

यह अवमानना याचिका ज्योति लाल महतो, मृणाल कुमार राय और अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल की गई है। मृणाल कुमार राय की ओर से अधिवक्ता संकल्प गोस्वामी ने अदालत में पक्ष रखा और न्यायालय को बताया कि आदेश पारित होने के लंबे समय बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।

पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शो-कॉज (जवाब) दाखिल किया गया था, जिसे अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अपने पूर्व आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि 20 अप्रैल 2026 को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि यदि आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसी क्रम में प्रतिवादी संख्या-2 को फॉर्म-1 के तहत नोटिस भी जारी किया गया था।

इसके बाद 15 मई 2026 को अदालत ने और कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि अगली तिथि तक आदेश का पालन नहीं होने पर अंतिम आदेश पारित किया जाएगा। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया था कि अवमानना के दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों का वेतन रोका जा सकता है तथा आदेश की अवहेलना का उल्लेख उनकी सेवा पुस्तिका में दर्ज किया जा सकता है।

अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि प्रतिवादी संख्या-2 के खिलाफ पहले ही फॉर्म-1 जारी किया जा चुका था, इसके बावजूद संबंधित अधिकारी पूर्व सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए थे। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को आदेशों के तत्काल अनुपालन का निर्देश दिया।

अब सभी की नजरें 12 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि तब तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई और अधिक सख्त हो सकती है।