खूंटी, 23 फ़रवरी । धरती आबा बिरसा मुंडा की जन्मभूमि उलिहातु में सोमवार को सरना धर्म सोतोः समिति के तत्वावधान में 14 वां शाखा स्थापना दिवस सह सरना प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर सरना स्थल में जेठा पहान, सनिका मुंडा, गोल्गा मुंडा और पांडु मुंडा के नेतृत्व में सिङबोंगा की विधिवत पूजा-पाठ कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भगवान बिरसा मुंडा के परपोता सुखराम मुंडा ने कहा कि धरती आबा ने जिस समृद्ध, संगठित और जागरूक समाज की परिकल्पना की थी, वह आज भी पूरी तरह साकार नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा ने न केवल ब्रिटिश शासन के शोषण, जुल्म और अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया, बल्कि समाज में फैली कुरीतियों, धार्मिक आडंबरों और अंधविश्वासों को दूर करने का भी प्रयास किया।
उन्होंने हिंसा, बलि प्रथा और नशापान जैसी बुराइयों से दूर रहने और जादू-टोना, डाइन-बिसाही और भूत-प्रेत को मन का भ्रम बताते हुए मूल धर्म सरना को सुसंगठित करने का आह्वान किया।
सुखराम मुंडा ने कहा कि जल-जंगल-जमीन के साथ धर्म, समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए धरती आबा ने अपना जीवन न्योछावर किया, इसलिए उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज को आगे बढ़ाना होगा।
धर्मगुरु बगरय मुंडा ने कहा कि सरना धर्म की पहचान, संरक्षण और संवर्धन के लिए सामाजिक और धार्मिक व्यवस्थाओं में एकरूपता जरूरी है। उन्होंने सरना समाज के अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा के लिए जातीयता और क्षेत्रीयता से ऊपर उठकर एकजुट होने पर बल दिया।
कार्यक्रम में धर्मगुरु सोमा कंडीर, भैयाराम ओड़ेया, जीतनाथ पहान, धीरजु मुंडा, मंगल मुंडा, बुधराम सिंह मुंडा, मनोज मंडल, किसुन राय मुंडा, मनाय मुंडा सहित अड़की, बिरबंकी कोचांग, दलभंगा, तमाड़, बुंडू, खूंटी, मुरहू और तपकारा क्षेत्र के बड़ी संख्या में सरना धर्मावलंबी उपस्थित थेे।
