खड़गपुर, 22 जनवरी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित एक विशिष्ट अंतःविषय पाठ्यक्रम ‘रचनात्मक नेतृत्व’ को संयुक्त रूप से प्रारंभ करने के लिए ईकलाकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक नेतृत्व शिक्षा के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
गुरुवार सुबह संस्थान से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पाठ्यक्रम गहन अनुसंधान के साथ-साथ उद्योग जगत के विशेषज्ञों, विद्यार्थियों, भारतीय ज्ञान परंपरा के विद्वानों तथा पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं से जुड़े कलाकारों से विचार-विमर्श कर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य शैक्षणिक गुणवत्ता, व्यावहारिक उपयोगिता और सांस्कृतिक प्रामाणिकता को समान रूप से सुदृढ़ करना है।
लगभग 30 घंटे की अवधि वाला यह पाठ्यक्रम आईआईटी खड़गपुर के भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। पाठ्यक्रम का संचालन उद्योग विशेषज्ञों और भारतीय ज्ञान परंपरा के विद्वानों द्वारा किया जाएगा। पारंपरिक कक्षा-केंद्रित शिक्षा पद्धति से आगे बढ़ते हुए, इसमें अनुभवात्मक शिक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अंतर्गत दुर्लभ एवं पारंपरिक भारतीय प्रदर्शन कलाओं को शिक्षण माध्यम के रूप में अपनाया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता, नवाचार, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और व्यावहारिक कौशल का विकास हो सके।
संस्थान ने बताया कि प्रारंभिक चरण में इस पाठ्यक्रम को ग्रीष्मकालीन पाठ्यक्रम के रूप में आरंभ किया जाएगा, जिसे भविष्य में नियमित शैक्षणिक पाठ्यक्रम के रूप में विकसित करने की योजना है।
इस अवसर पर आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि संस्थान में नेतृत्व शिक्षा को केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं माना जाता।
उन्होंने कहा कि रचनात्मकता, सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों का समावेश नेतृत्व निर्माण के लिए आवश्यक है। ईकलाकार के साथ यह सहयोग भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके अनुसार, भारतीय प्रदर्शन कलाओं की समृद्ध परंपराओं से प्रेरित यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को नवाचार, संवेदनशीलता और वैश्विक दृष्टिकोण के साथ नेतृत्व करने के लिए तैयार करेगा।
शिक्षाविदों का मानना है कि यह सहयोग आईआईटी खड़गपुर की समग्र, मूल्य-आधारित और भविष्य-उन्मुख शिक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत करेगा तथा देश में नेतृत्व शिक्षा को एक नई दिशा प्रदान करेगा।
