पुरुलिया, 20 सितंबर । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को पुरुलिया में आयोजित करम पर्व के कार्यक्रम में कुड़माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी और निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसे पूरा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुड़मी समाज की लंबे समय से चली आ रही मांगों को उनकी सरकार पूरा करेगी। उन्होंने आंदोलन के दौरान कुड़मी समुदाय के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का भी आश्वासन दिया।
अधिकारी ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान आंदोलन के समय पुलिस का इस्तेमाल किया गया और कई मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार कुड़मी समाज से किए गए संकल्प-पत्र के वादों को पूरा करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संथाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का काम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुआ था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार कुड़मी और राजबंशी भाषाओं को भी आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए पहल करेगी।
उन्होंने कुड़मी विकास परिषद को फिर से सक्रिय करने की बात भी कही। मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछली सरकार ने परिषद के लिए 10 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जबकि वर्तमान सरकार ने 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। जरूरत पड़ने पर राशि और बढ़ाई जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि पश्चिमांचल विकास विभाग उनके पास है और विभाग के लिए आवंटित सोलह सौ करोड़ रुपये पश्चिमांचल के विकास पर खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कुड़मी समाज के प्रतिनिधियों के साथ 30 सितंबर को नवान्न में बैठक भी होगी।
कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आजसू प्रमुख सुदेश महतो भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने आदिवासी कुड़मी समाज के नेता अजीत महतो के साथ करम वृक्ष का पौधारोपण भी किया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित आयोग गठित किया गया है और कुड़मी समाज को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है। उन्होंने भाषा, संस्कृति, परंपरा और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर समाज को भरोसा दिलाया।
