उच्च न्यायालय

रांची, 15 जनवरी । जमीन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय के समन वाले केस को निरस्त करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से झारखंड उच्च न्यायालय में दायर याचिका खारिज हो गई है। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद मुख्यमंत्री की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

अधिवक्ता दीपांकर रॉय ने बताया कि अदालत ने कहा कि इस स्टेज पर केस में दखल देना उचित नहीं होगा। हालांकि अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि मुख्यमंत्री उच्च न्यायालय के इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगे या नहीं।

उच्च न्यायालय के इस फैसले से एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रायल की प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। क्योंकि 4 मार्च को सीजीएम कृष्ण कांत मिश्रा ने आईपीसी की धारा 174 के तहत मामले में संज्ञान लेते हुए केस के एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। ईडी ने मुख्यमंत्री की ओर से आठ समन को नजरअंदाज करने पर कंप्लेन दायर किया था। एमपी-एमएलए कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी को तय हुई है।

उल्लेखनीय है कि इसी मामले में छह दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सशरीर उपस्थित हुए थे। उन्होंने 7-7 हजार रुपये के दो बेल बॉंड भी भरे थे। इसी आधार पर उन्हें ट्रायल के दौरान सशरीर पेशी से छूट मिली थी।

ईडी ने रांची के एमपी-एमएलए कोर्ट में मुख्यमंत्री के खिलाफ याचिका दायर की है। ईडी का कहना है कि जमीन घोटाला मामले में पूछताछ के लिए जारी एजेंसी के कई समन को उन्होंने नजरअंदाज किया था। तब मुख्यमंत्री ने निचली अदालत की कार्यवाही को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए इसे निरस्त करने की मांग की थी।