रांची, 05 मई। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो की पुलिस हिरासत में पिटाई के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। इस प्रकरण में स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सरायकेला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को निर्देश दिया है कि वे अपने जिले के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की स्थिति और इस दिशा में की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करें।
इसके साथ ही अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से यह भी पूछा है कि जिस मेडिकल अधिकारी ने तरुण महतो को अदालत में पेश किए जाने के समय ‘फिट फॉर कस्टडी’ का प्रमाणपत्र जारी किया था, उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
अदालत ने दोनों अधिकारियों को 18 जून तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इससे पहले राज्य सरकार की ओर से अदालत में प्रस्तुत जवाब में बताया गया कि पीड़ित तरुण महतो को अंतरिम राहत के तौर पर 1.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रितेश कुमार महतो ने पक्ष रखा।
उल्लेखनीय है कि तरुण महतो वर्ष 2024 के चुनाव में जेएलकेएम के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रह चुके हैं। 19 नवंबर 2025 की रात ईचागढ़ पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर थाने गई थी, जहां कथित तौर पर उनकी बेरहमी से पिटाई की गई। आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ थर्ड डिग्री टॉर्चर किया।
इस घटना के विरोध में तरुण महतो की पत्नी ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर न्याय की मांग की थी। इसी पत्र के आधार पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की। पहले की सुनवाई में अदालत ने सरायकेला के पुलिस अधीक्षक को दस्तावेजों के साथ पेश होने का निर्देश भी दिया था।
