बारुईपुर, 5 सितंबर । एक ओर देशभर में शिक्षक दिवस पर शिक्षकों और शिक्षाविदों को सम्मान दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बंगाल के शिक्षा और समाज सुधार के अग्रदूत ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा बारुईपुर में जंगल-झाड़ियों के बीच पड़ी मिली। घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी गई। लोग नगरपालिका की निगरानी तथा रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
यह घटना बारुईपुर नगरपालिका के वार्ड नंबर 11 स्थित विद्यासागर शिशु उद्यान की है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्चों के मनोरंजन और खेलकूद के लिए बनाए गए इस पार्क में विद्यासागर की प्रतिमा स्थापित की गई थी। आरोप है कि प्रतिमा को उसके निर्धारित स्थान से हटाकर पास की झाड़ियों में डाल दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घटनास्थल के पास से रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। इसके बावजूद इतने दिनों तक प्रतिमा की ऐसी स्थिति पर किसी का ध्यान नहीं गया, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
खास बात यह है कि यह स्थान बारुईपुर महकमा शासक कार्यालय और बारुईपुर नगरपालिका से कुछ ही दूरी पर है। ऐसे में स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि प्रशासनिक और नगरपालिका कार्यालयों के इतने करीब स्थित पार्क में विद्यासागर की प्रतिमा इस हालत में कैसे पहुंची और इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं हुई।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, 26 सितंबर 2020 को विद्यासागर शिशु उद्यान में इस प्रतिमा का उद्घाटन किया गया था। तत्कालीन वार्ड नंबर 11 के पार्षद मोजफ्फर अहमद ने प्रतिमा का उद्घाटन किया था। बच्चों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने के साथ-साथ महान शिक्षाविद् की स्मृति को सम्मान देने के उद्देश्य से प्रतिमा स्थापित की गई थी।
स्थानीय निवासियों ने कहा कि ईश्वरचंद्र विद्यासागर केवल एक शिक्षाविद् नहीं थे, बल्कि बंगाल के समाज सुधार और शिक्षा के आधुनिकीकरण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महिला शिक्षा के प्रसार और विधवा विवाह के समर्थन सहित सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है।
प्रतिमा के झाड़ियों में पड़े मिलने के बाद कई सवाल सामने आए हैं—प्रतिमा को निर्धारित स्थान से किसने हटाया? इसे हटाने की वजह क्या थी? क्या नगरपालिका से इसकी अनुमति ली गई थी? यदि किसी निर्माण या मरम्मत कार्य के लिए प्रतिमा हटाई गई थी, तो उसे सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं रखा गया?
स्थानीय लोगों ने पार्क की साफ-सफाई और नियमित रखरखाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि पार्क की नियमित देखभाल नहीं की जाएगी तो झाड़ियां और कचरा जमा होना स्वाभाविक है, लेकिन उसी झाड़ी में विद्यासागर की प्रतिमा का पड़े रहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
शिक्षक दिवस के दिन यह तस्वीर सामने आने से लोगों की नाराजगी और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस दिन देशभर में शिक्षकों और महान शिक्षाविदों को श्रद्धांजलि दी जा रही है, उसी दिन विद्यासागर की प्रतिमा का इस तरह उपेक्षित अवस्था में मिलना गंभीर चिंता का विषय है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रतिमा को तत्काल झाड़ियों से निकालकर सम्मानपूर्वक उसके उचित स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाए। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि प्रतिमा वहां तक कैसे पहुंची और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
अब नजर बारुईपुर नगरपालिका और प्रशासन के अगले कदम पर है। सवाल यही है—क्या शिक्षक दिवस पर सामने आई यह तस्वीर नगरपालिका की नींद खोलेगी? और क्या विद्यासागर की प्रतिमा फिर सम्मान के साथ अपने स्थान पर लौटेगी?
