धनबाद, 22 अक्टूबर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी-आइएसएम), धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा को प्रतिष्ठित पद्म विभूषण डॉ. मुरली मनोहर जोशी महान शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए सर्वसम्मति से चुना गया है। उन्हें यह सम्मान उच्च शिक्षा, अभियांत्रिकी शिक्षा, शोध और ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाएगा।
फेडरेशन फॉर वर्ल्ड एकेडमिक्स (एफडब्ल्यूए) की चयन समिति ने प्रो. मिश्रा का चयन किया है। आगामी 22 नवंबर को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित समारोह में डॉ. मुरली मनोहर जोशी उन्हें सम्मानित करेंगे।
प्रो. मिश्रा विद्युत अभियांत्रिकी के क्षेत्र में अपने शोध कार्यों के लिए जाने जाते हैं। उनके प्रमुख शोध क्षेत्रों में पावर सिस्टम, पावर क्वालिटी, नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट ग्रिड शामिल हैं। इन क्षेत्रों में उनके योगदान का उद्देश्य बिजली व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने, ऊर्जा संबंधी चुनौतियों का समाधान करने और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को बढ़ावा देना है।
उन्होंने 15 मई 2024 को आइआइटी (आइएसएम), धनबाद के निदेशक का कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह आइआइटी दिल्ली के अबू धाबी परिसर में डीन (रिसर्च एंड एक्सटर्नल एंगेजमेंट) और एसोसिएट डीन (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) सहित कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक पदों पर कार्य कर चुके हैं।
शिक्षण, शोध और नवाचार के क्षेत्र में प्रो. मिश्रा को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। इनमें इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी का यंग साइंटिस्ट मेडल, इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग का यंग इंजीनियर अवार्ड, समंत चंद्रशेखर पुरस्कार, बिमल बोस पुरस्कार, एनएएसआइ-रिलायंस प्लेटिनम जुबली अवार्ड और आइएनएई आउटस्टैंडिंग टीचर्स अवार्ड प्रमुख हैं। वह कई प्रतिष्ठित पेशेवर संस्थाओं के फेलो भी हैं।
एफडब्ल्यूए ने इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2025 में की थी। इसका उद्देश्य भारत के बौद्धिक, वैज्ञानिक और सार्वजनिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों के आजीवन कार्यों को सम्मानित करना है।
प्रो. सुकुमार मिश्रा को इस पुरस्कार के लिए चुना जाना आइआइटी (आइएसएम), धनबाद के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे तकनीकी शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और ऊर्जा क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
