भाषा दिवस 2

मातृभाषा दिवस पर कोलकाता में राजस्थानी भाषा दिवस का आयोजन, भाषा संरक्षण पर जोर

कोलकाता, 21 फरवरी।

ओंकार समाचार

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर राजस्थानी प्रचारिणी सभा, राजस्थान सूचना केंद्र और भारत जैन महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को राजस्थानी भाषा दिवस का आयोजन किया गया।

मुख्य वक्ता प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर ऋषि भूषण ने कहा कि यदि हम अपनी भाषा और बोलियों को संरक्षित नहीं करेंगे तो अपनी पहचान खो देंगे। भाषा के लुप्त होने से हमारी सामूहिक चेतना में व्‍याप्‍त ज्ञान-संपदा भी समाप्त हो जाती है। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी भाषाई विविधता में निहित है।

प्रो. ऋषि भूषण ने कहा कि सरकारों को भाषा संबंधी मुद्दों को टालना नहीं चाहिए और किए गए वादों को पूरा करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्थानीय भाषाओं के लिए वरदान सिद्ध हो सकती है, क्योंकि इसके माध्यम से कम लागत में क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में सामग्री प्रकाशित की जा सकती है। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज विद्यालयों में मातृभाषा बोलने वाले विद्यार्थियों को हतोत्साहित किया जाता है।

कार्यक्रम में डॉ. ऋषि भूषण ने ‘गीतांजलि’ के भोजपुरी अनुवाद का लोकार्पण भी किया।

उद्यमी एवं समाजसेवी प्रहलाद रॉय गोयनका ने बताया कि वे राजस्थानी भाषा के संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा के स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को उनकी ओर से छात्रवृत्ति दी जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कक्षा 1 से 10 तक की विभिन्न विषयों की पुस्तकों का राजस्थानी में अनुवाद कर ई-बुक के रूप में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए वे प्रयासरत हैं और इस विषय पर राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री से चर्चा कर रहे हैं।

कार्यक्रम में साहित्यकार राजेंद्र केड़िया ने कहा कि पहले पहनावा और भाषा और भाषा हमारी पहचान हुआ करती थी। पहनावा हम खो चुके हैं। वर्तमान में भाषा ही हमारी प्रमुख पहचान रह गई है। भाषा को भी खो दिया तो हमारी पहचान खो जाएगी।

उन्होंने कहा कि राजस्थानी अत्यंत समृद्ध भाषा है, जिसकी शब्द-संपदा और कहावतें अत्यधिक व्यापक हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हम स्वयं अपनी भाषा को पढ़ें, समझें और दूसरों को भी इसके महत्व से अवगत कराएं।

अमेरिका से आए डॉ. शशि शेख शाह ने कहा कि जिस भाषा की जितनी अधिक बोलियां होती हैं, वह उतनी ही समृद्ध होती है। राजस्थानी की अनेक बोलियां इसे अत्यंत समृद्ध बनाती हैं। उन्होंने कहा कि जब साहित्य अकादमी राजस्थानी को भाषा मानती है, तो यह बात हमें सरकार को समझानी होगी और इसकी मान्यता के लिए प्रयास करने होंगे।

इस अवसर पर राजस्थानी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष रतन शाह ने कहा कि हमें राजस्‍थानी को अपने जीवन में उतारना चाहिए,  राजस्थानी  में बोलना चाहिए, लिखना चाहिए और जब जनगणना हो तो भाषा के कॉलम में अपनी भाषा राजस्थानी लिखवानी चाहिए ताकि सरकार को यह पता चले कि राजस्थानी कितनी व्यापक और विस्तृत भाषा है और इसे बोलने वाले कितने लोग हैं।

कार्यक्रम में राजस्थानी मूल के हिंदी साहित्यकार दाऊलाल कोठारी तथा बांग्ला साहित्यकार शंकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रारंभ में भारत जैन महिला मंडल की अंजू सेठिया ने स्वागत भाषण दिया, वहीं मंडल की सदस्याओं ने ‘धरती धोरां री’ गीत की प्रस्तुति दी।