धान की फसल बर्बाद, कई मकान क्षतिग्रस्त – प्रशासन अलर्ट पर
पश्चिमी सिंहभूम, 10 सितम्बर। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर और झींकपानी प्रखंड इन दिनों जंगली हाथियों के आतंक से जूझ रहे हैं। मंगलवार रात से हाथियों का एक बड़ा झुंड गांव-गांव घूमता हुआ देखा जा रहा है। बुधवार सुबह सिंहपोखरिया पंचायत के सूर्याबासा गांव में करीब 15 से 16 हाथियों का दल पहुंच गया, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों ने खेतों में लगी धान की फसल को बुरी तरह रौंद दिया है। कई एकड़ में फैली फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। इसके अलावा कुछ मकानों की दीवारें और गोदाम भी हाथियों ने तोड़ दिए। कुछ परिवार भयवश घर छोड़कर नजदीकी रिश्तेदारों या सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण विशेष रूप से चिंतित हैं।
हाथियों के गांव में प्रवेश की खबर मिलते ही जिला प्रशासन और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने गांव का मुआयना किया और हाथियों को आबादी से दूर जंगल की ओर खदेड़ने के प्रयास शुरू किए। वन विभाग ने बताया कि विशेष गश्ती दल तैनात कर दिया गया है और हाथियों की गतिविधियों पर ड्रोन और फ्लैशलाइट से भी निगरानी रखी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि हाथी दल को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें सुरक्षित रूप से आबादी क्षेत्र से बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए हाथी-मार्गों की पहचान की जा रही है, ताकि उन्हें प्राकृतिक रास्ते से जंगल की ओर ले जाया जा सके।
घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने प्रशासन से हाथियों को जल्द से जल्द गांव से बाहर हटाने की मांग की। उनका कहना है कि लगातार हो रहे फसल नुकसान से उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। कई परिवारों के पास खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि फसल और संपत्ति की क्षति का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।
गांव के किसान लक्ष्मण महतो ने बताया, “हमने साल भर मेहनत कर धान की फसल बोई थी, लेकिन हाथियों ने एक ही रात में सब बर्बाद कर दिया। अब हमारे सामने परिवार पालने का संकट खड़ा हो गया है।” इसी तरह एक अन्य ग्रामीण सावित्री देवी ने कहा, “बच्चों और महिलाओं को लेकर हम बेहद डरे हुए हैं। हम रात में घर छोड़कर बाहर खुले में सोने को भी मजबूर हैं।”
जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और रात में घरों से बाहर निकलने से बचें। साथ ही वन विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी भी गांव में हाथी दल नजर आता है तो तुरंत इसकी सूचना कंट्रोल रूम या नजदीकी थाना को दें।
वन विभाग के कर्मियों ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि वे हाथियों को उत्तेजित न करें, पटाखे या तेज आवाज से भगाने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे वे और आक्रामक हो सकते हैं।
लगातार बढ़ रही हाथियों की समस्या
पश्चिमी सिंहभूम सहित झारखंड के कई जिलों में जंगली हाथियों का आतंक पिछले कुछ वर्षों से गंभीर समस्या बन चुका है। जंगलों के सिकुड़ने और हाथियों के प्राकृतिक आवास पर अतिक्रमण के कारण वे अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों में आ जाते हैं। परिणामस्वरूप फसल, संपत्ति और कभी-कभी जान-माल का भी भारी नुकसान होता है।
वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिले में इस वर्ष अब तक हाथियों के कारण 8 से अधिक घटनाओं में फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। कई बार ग्रामीणों और हाथियों के बीच सीधी मुठभेड़ भी हुई, जिससे दोनों पक्षों को क्षति उठानी पड़ी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का दीर्घकालीन समाधान हाथियों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित करने और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में निहित है। इसके लिए वन विभाग द्वारा हाथी कॉरिडोर विकसित करने, जंगलों में पर्याप्त जल व भोजन की व्यवस्था करने और प्रभावित ग्रामीणों को समय पर मुआवजा देने की योजनाएँ चलाई जा रही हैं।
ग्रामीणों में दहशत
हालांकि फिलहाल सूर्याबासा और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। लोग दिन ढलते ही अपने बच्चों और पशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाते हैं। कई लोग अपने घरों की छतों पर रात गुजार रहे हैं ताकि हाथियों से दूरी बनाए रखी जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक हाथियों को पूरी तरह से क्षेत्र से बाहर नहीं निकाला जाता, वे चैन की सांस नहीं ले सकते। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि हाथियों को सुरक्षित ढंग से जंगल की ओर भेजने तक निगरानी लगातार जारी रहेगी।
