____ __ ____

सरायकेला -खरसावां, 2 अगस्‍त। चांडिल रेंज अंतर्गत सुखसारी गांव में शनिवार देर रात जंगली हाथी ने जमकर उत्पात मचाया, भोजन की तलाश में गांव में घुसे हाथी ने एक के बाद एक तीन कच्चे मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया और घरों में रखा चावल खा गया, घटना के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई और ग्रामीणों ने पूरी रात जागकर हाथी की निगरानी करते हुए किसी तरह उसे आबादी से दूर भगाने का प्रयास किया.

ग्रामीणों के अनुसार रात करीब 11 बजे से 12 बजे के बीच हाथी गांव में पहुंचा, सबसे पहले उसने छूटू महतो के घर की दीवार तोड़कर अंदर रखा दो बोरा चावल खा लिया। इसके बाद गुणाधर महतो के घर में घुसकर वहां भी दो बोरा चावल को नुकसान पहुंचाया, हाथी ने तीसरे घर की दीवार भी तोड़ दी, दीवार गिरने की तेज आवाज सुनकर घरों में सो रहे लोग किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में सफल रहे, ग्रामीणों का कहना है कि यदि कुछ मिनट की भी देरी होती तो बड़ा हादसा हो सकता था.

लगातार बारिश से कमजोर हो चुके मिट्टी के मकानों पर हाथी का हमला ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा रहा है, किसानों का कहना है कि दिनभर खेतों में धान रोपनी के बाद रात में हाथियों के डर से चैन की नींद भी नसीब नहीं हो रही है, घर, अनाज और फसल के साथ अब जान-माल की सुरक्षा भी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.

घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, उनका कहना है कि चांडिल रेंज कार्यालय गांव से महज दो-तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसके बावजूद हाथी आबादी में पहुंचकर लगातार तोड़फोड़ करता रहा, ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी और समय रहते रोकथाम की व्यवस्था पर्याप्त नहीं दिख रही है.

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जंगलों के सिकुड़ते दायरे, भोजन और पानी की कमी के कारण हाथी लगातार आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, इससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है, उनका दावा है कि हाल के वर्षों में दलमा के जंगलों में हाथियों की मौजूदगी अपेक्षाकृत कम दिख रही है, जबकि चाकुलिया और ईचागढ़ क्षेत्र के गांवों में हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है.

ग्रामीणों ने दलमा क्षेत्र में पर्यटन विकास पर हो रहे बड़े निवेश का उल्लेख करते हुए मांग की कि पर्यटन सुविधाओं के साथ-साथ हाथी-मानव संघर्ष को रोकने के लिए भी स्थायी और प्रभावी व्यवस्था की जाए, उन्होंने हाथियों की निगरानी, त्वरित सूचना प्रणाली, एलिफेंट ड्राइव अभियान को और प्रभावी बनाने तथा प्रभावित परिवारों को समयबद्ध मुआवजा एवं क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने की मांग की.

घटना के बाद वन विभाग की टीम ने प्रभावित घरों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है, विभाग का कहना है कि रातभर हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन कम समय के भीतर उसने तीन घरों को क्षति पहुंचा दी, विभाग ने प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने के लिए आवश्यक कागजी प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है.

ग्रामीणों का कहना है कि केवल नुकसान का आकलन और मुआवजा पर्याप्त नहीं है, जब तक हाथी-मानव संघर्ष को रोकने के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी रणनीति लागू नहीं की जाती, तब तक ग्रामीणों की सुरक्षा और आजीविका पर खतरा बना रहेगा.