कलकत्ता हाईकोर्ट

कोलकाता, 23 अप्रैल। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच बाइक पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग पर कड़ी टिप्पणी की है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने कहा कि आयोग अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है और आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।

अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि मतदान से दो दिन पहले इस तरह का प्रतिबंध क्यों लगाया गया? न्यायालय ने निर्देश दिया कि आयोग शुक्रवार को शपथपत्र दाखिल कर बताए कि इस आदेश की जरूरत क्यों पड़ी?

अधिवक्ता रत्नांकर दास की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राव ने कहा कि इस तरह सामान्य नागरिकों के अधिकार नहीं छीने जा सकते। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि यही तर्क है तो फिर कारों पर भी रोक लगा दीजिए, क्योंकि उनमें भी हथियार ले जाकर उपद्रव किया जा सकता है।

अदालत ने आयोग से यह भी पूछा कि पिछले पांच वर्षों में कितने ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें बाइक सवारों ने चुनाव के दौरान हिंसा या अशांति फैलाई हो? न्यायालय ने कहा कि दो दिन पहले से सब कुछ ठप कर देने जैसा कदम उचित नहीं कहा जा सकता।

न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासनिक विफलता छिपाने के लिए इस प्रकार के आदेश जारी किए गए हैं।

चुनाव आयोग के इस निर्देश को चुनौती देते हुए बुधवार को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया था। अदालत ने याचिका दायर करने की अनुमति दी थी। गुरुवार को उसी मामले पर सुनवाई हुई।

अब आयोग को शुक्रवार को अपना पक्ष हलफनामे के जरिए अदालत के सामने रखना होगा, जिसमें वह प्रतिबंध के पीछे के कारणों और पूर्व घटनाओं का ब्यौरा दे सकता है।