कोलकाता, 14 अप्रैल । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कोलकाता के दक्षिणी हिस्से की जादवपुर विधानसभा सीट राज्य की अहम और हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल है। अपनी बौद्धिक पहचान, उच्च साक्षरता और राजनीतिक रूप से जागरूक मतदाताओं के कारण यह सीट हमेशा से अलग महत्व रखती रही है। इस बार यहां चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और वाम मोर्चा के बीच सीधी त्रिकोणीय टक्कर देखने को मिल रही है।
जादवपुर विधानसभा क्षेत्र सामान्य श्रेणी की सीट है, जो मुख्य रूप से कोलकाता नगर क्षेत्र में स्थित है, जबकि इसका एक छोटा हिस्सा दक्षिण 24 परगना जिले में भी आता है। यह क्षेत्र कोलकाता नगर निगम के 10 वार्डों से मिलकर बना है और जादवपुर लोकसभा क्षेत्र के सात विधानसभा खंडों में से एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूरी तरह शहरी स्वरूप वाले इस इलाके में ग्रामीण आबादी नहीं है।
राजनीतिक महत्व के साथ-साथ जादवपुर शिक्षा और संस्कृति का भी बड़ा केंद्र है। यहां 1955 में स्थापित जादवपुर विश्वविद्यालय देश के प्रमुख शिक्षण और शोध संस्थानों में गिना जाता है। इसके अलावा इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस, सेंट्रल ग्लास एंड सिरेमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, एस.एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल बायोलॉजी जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान इस क्षेत्र को बौद्धिक और वैज्ञानिक पहचान देते हैं। यही कारण है कि जादवपुर लंबे समय से वैचारिक बहस, छात्र राजनीति और बौद्धिक आंदोलनों का केंद्र रहा है।
इस सीट का राजनीतिक इतिहास भी बेहद दिलचस्प रहा है। 1967 में अस्तित्व में आई यह सीट लंबे समय तक माकपा का गढ़ रही है। अब तक 1983 के उपचुनाव समेत कुल 15 चुनाव यहां हो चुके हैं, जिनमें से 13 बार माकपा ने जीत दर्ज की। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से खास तौर पर जुड़ी रही है, जिन्होंने 1987 से 2006 तक लगातार पांच बार यहां से जीत हासिल की। हालांकि 2011 में तृणमूल कांग्रेस के मनीष गुप्ता ने उन्हें 16 हजार 684 वोटों से हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया। यह जीत केवल जादवपुर तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसी के साथ पश्चिम बंगाल में 34 वर्षों से चली आ रही वाम मोर्चा सरकार का अंत हो गया और राज्य की राजनीति में नए दौर की शुरुआत हुई।
इसके बाद से जादवपुर में तृणमूल कांग्रेस की पकड़ मजबूत होती गई। 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के देबब्रत मजूमदार ने माकपा के सुजन चक्रवर्ती को 38 हजार 869 वोटों से हराया। इस चुनाव में भाजपा तीसरे स्थान पर रही, लेकिन उसका वोट शेयर माकपा के काफी करीब था, जिससे संकेत मिला कि भाजपा इस क्षेत्र में तेजी से अपनी पकड़ बना रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस ने इस विधानसभा क्षेत्र में अपनी बढ़त बरकरार रखी। दिलचस्प रूप से उसकी बढ़त 2019 के 12 हजार 155 वोट से बढ़कर 17 हजार 849 वोट तक पहुंच गई, जबकि भाजपा माकपा को पीछे छोड़ते हुए दूसरे स्थान पर आ गई, जो यहां उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
मतदाताओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां दो लाख 79 हजार 828 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2024 के लोकसभा चुनाव तक बढ़कर दो लाख 94 हजार 186 हो गए। इस बार 2026 में एसआईआर के बाद ये संख्या और कम हुई है। इस पूरी तरह शहरी सीट पर लगभग 11.68 प्रतिशत अनुसूचित जाति मतदाता हैं, जबकि मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब आठ प्रतिशत है। उच्च साक्षरता और राजनीतिक जागरूकता के कारण यहां मतदान प्रतिशत हमेशा 80 प्रतिशत से अधिक रहा है, जो इस क्षेत्र की सक्रिय लोकतांत्रिक भागीदारी को दर्शाता है।
आर्थिक रूप से जादवपुर कभी छोटे और मझोले उद्योगों का केंद्र रहा है, लेकिन वाम मोर्चा के शासनकाल में कई उद्योग बंद हो गए, जिससे रोजगार पर असर पड़ा। वर्तमान समय में यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, खुदरा व्यापार और सेवा क्षेत्र पर आधारित है।
2026 के चुनाव में यहां मुकाबला पूरी तरह त्रिकोणीय हो गया है। तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर देबब्रत मजूमदार पर भरोसा जताया है। देबब्रत के अनुसार, वाम मोर्चा के समय यह इलाका हिंसा का गढ़ था, जबकि अब यहां शांति और विकास का माहौल है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल प्रबुद्ध लोगों की भूमि है और यहां के मतदाता विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेंगे।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने सर्बरी मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया है, जो अपेक्षाकृत नया चेहरा हैं। उन्होंने तृणमूल सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि राज्य की जनता ममता बनर्जी के कुशासन से त्रस्त है। उनके अनुसार, जादवपुर में विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन तृणमूल ने केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार राज्य में डबल इंजन की सरकार बनेगी और जादवपुर सहित पूरे पश्चिम बंगाल में विकास को नई गति मिलेगी।
वहीं वाम मोर्चा ने अनुभवी अधिवक्ता और कोलकाता के पूर्व मेयर विकास रंजन भट्टाचार्य को मैदान में उतारा है। उन्होंने भाजपा और तृणमूल दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि ये दल मजहबी कट्टरता की राजनीति कर रहे हैं और विकास उनके एजेंडे में नहीं है। उनका कहना है कि दोनों दल जनता को गुमराह कर सत्ता में बने रहना चाहते हैं। उन्होंने जादवपुर की बौद्धिक परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि इस बार यहां के मतदाता एक मजबूत वैकल्पिक शक्ति के रूप में वाम मोर्चा को चुन सकते हैं।
कुल मिलाकर जादवपुर विधानसभा सीट पर 2026 का चुनाव बेहद दिलचस्प और कांटे का मुकाबला बनता नजर आ रहा है। यहां केवल राजनीतिक दलों के बीच ही नहीं, बल्कि विचारधाराओं, विकास मॉडल और शासन के दृष्टिकोण के बीच भी सीधी टक्कर है। तृणमूल कांग्रेस अपनी स्थापित पकड़ को बनाए रखने की कोशिश में है, भाजपा तेजी से उभरती चुनौती पेश कर रही है, जबकि वाम मोर्चा अपनी पारंपरिक बौद्धिक जमीन को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में मामूली वोटों का अंतर भी परिणाम को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है और यही कारण है कि जादवपुर इस बार राज्य की सबसे महत्वपूर्ण और रोमांचक सीटों में शामिल हो गई है।
