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अवैध कोयला, बालू, पत्थर और पशु परिवहन की शिकायत के लिए भी अलग हेल्पलाइन, छह नए क्षेत्रीय फोरेंसिक प्रयोगशालाएं स्थापित होंगी

कोलकाता, 23 जुलाई । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ट्रैफिक पुलिस की अवैध वसूली पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए राज्यभर में आधुनिक निगरानी तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया है। इसके लिए एक बड़ा नियंत्रण कक्ष बनाया जा रहा है और सड़क पर किसी भी पुलिसकर्मी द्वारा अवैध रूप से धन मांगने की शिकायत दर्ज कराने के लिए गुरुवार को तीन समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएंगे।

विधानसभा में गृह विभाग के बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि यदि कहीं भी ट्रैफिक पुलिस अवैध वसूली करती दिखाई दे तो लोग तुरंत हेल्पलाइन पर सूचना दें। उन्होंने बताया कि बिना वैध दस्तावेज के कोयला, बालू, पत्थर, पशु और अन्य वस्तुओं के अवैध परिवहन की शिकायत दर्ज कराने के लिए भी अलग व्यवस्था की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की तर्ज पर अत्याधुनिक नियंत्रण कक्ष बनाया जा रहा है। इसके माध्यम से राज्य के किसी भी हिस्से में होने वाली अवैध वसूली की जानकारी तत्काल मुख्यालय तक पहुंच सकेगी। उन्होंने कहा कि फरक्का या कालियाचक जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में भी यदि कोई पुलिसकर्मी अवैध रूप से धन मांगता है तो उसकी सूचना तुरंत कोलकाता स्थित नियंत्रण कक्ष तक पहुंचेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने गृह विभाग के बजट में पुलिस व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि पुलिस के रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा। साथ ही खड़गपुर, बैरकपुर, कल्याणी, मुर्शिदाबाद, सिंगुर और मालदा में छह नई क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इससे आपराधिक मामलों की जांच में तेजी आएगी। मोबाइल फोरेंसिक इकाइयों की संख्या बढ़ाने और उन्हें आधुनिक बनाने की भी योजना है।

उन्होंने बताया कि घुसपैठ रोकने के लिए सीमा से लगे 12 जिलों के 319 गांवों को सीमा सुरक्षा बल की “आंख और कान” के रूप में विकसित किया जाएगा। झाड़ग्राम जिले में माओवादी गतिविधियों से निपटने के लिए विशेष पैकेज भी दिया जाएगा। राज्य की खुफिया व्यवस्था को राष्ट्रीय गुप्तचर ग्रिड से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है। कुछ पुलिसकर्मियों को गुजरात के रक्षा विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण के लिए भेजा जा रहा है, जबकि असम में सीमा सुरक्षा बल के प्रशिक्षण संस्थान में भी पुलिसकर्मियों को भेजने की योजना है। तटीय पुलिस के प्रशिक्षण के लिए सीमा सुरक्षा बल के साथ समझौता किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने का समय कम करने के लिए भी नई कार्ययोजना तैयार की जा रही है।